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ओवैसी अब कांग्रेस और एनसीपी से करना चाहते हैं गठबंधन, शिवसेना को नहीं मंजूर

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मुंबई (मा.स.स.). ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) महाराष्ट्र सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहती है। AIMIM सांसद इम्तियाज ने यह दावा किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी भाजपा की ‘बी टीम’ नहीं है। हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली AIMIM एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एआईएमआईएम नेता जलील ने बताया कि उनकी मां के निधन के बाद राकंपा नेता राजेश टोपे उनके घर आए थे। AIMIM नेता ने बताया, ‘यह हमेशा आरोप लगाया जाता है कि भाजपा हमारे कारण जीत जाती है। इस आरोप को गलत साबित करने के लिए, मैंने टोपे के सामने प्रस्ताव रखा है कि  हम गठबंधन के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने मेरी पेशकश के बारे में कुछ भी नहीं कहा।’ जलील AIMIM की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख भी हैं।

उन्होंने कहा कि अब हम यह देखना चाहते हैं कि ये AIMIM के खिलाफ आरोप हैं या वे हमारे साथ हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘बात यह है कि ये पार्टियां मुसलमानों के वोट चाहती हैं। NCP ही क्यों, कांग्रेस ने भी यह कहा है कि वे सेक्युलर हैं और वे भी मुसलमानों के वोट चाहते हैं। हम उनके साथ भी हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। भाजपा ने देश का पूरा बर्बाद कर दिया है। हम उन्हें हराने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।’

AIMIM ने उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से भी बात की थी। सांसद ने कहा कि वे मुसलमानों के वोट चाहते थे, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी को नहीं। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में भी ये पार्टियां (कांग्रेस और एनसीपी) मुसलमानों के वोट चाहती है, लेकिन AIMIM को नहीं। आप भाजपा की जीत के लिए हमें जिम्मेदार बताते हैं। तो मैं प्रस्ताव देता हूं कि हमें साथ चुनाव लड़ने दें।’ AIMIM सांसद से सवाल किया गया कि क्या गठबंधन का प्रस्ताव औरंगाबाद नगर निगम चुनाव तक सीमित है या नहीं। इसपर उन्होंने कहा कि यह NCP और कांग्रेस की तरफ से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ‘नहीं, तो हम अकेले चलेंगे। हम उन्हें मौका दे रहे हैं, क्योंकि वे हमें बी टीम कहते हैं।’

वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी की सहयोगी शिवसेना को यह प्रस्ताव रास नहीं आ रहा है। ओवैसी स्वयं को आक्रांता मुस्लिम शासकों को अपना मार्गदर्शक मानते हैं, जबकि शिवसेना हमेशा इस विचारधारा के उलट काम करने के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में प्रदेश स्तर पर यह गठबंधन हो भी गया, तो ज्यादा दिनों टिक नहीं पायेगा।

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