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कम हुई लखनऊ की मस्जिदों में लाउडस्पीकर की आवाज, पहले मुसलमान खुद करते थे विरोध

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लखनऊ (मा.स.स.). देशभर में धार्मिक पर्वों के इस दौर में जुलूस और लाउडस्पीकर को लेकर विवाद जारी है. दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश तक दंगे हो रहे हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थलों और धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर कुछ निर्देश जारी किए. प्रशासन की सख्ती से पहले ही सरकार के निर्देशों का लखनऊ के मस्जिदों में पालन शुरू हो गया है. लखनऊ के शिया धर्मगुरु सैफ अब्बास अपने तबके से जुड़े तमाम मस्जिदों को सख्त निर्देश दे चुके हैं कि सरकार के आदेशों की तालीम हो. सरकारी निर्देशों का मस्जिदों पर असर पड़ा है और रोजे के इस दौर में नए नियम लागू किए गए हैं.

सरकार के नए नियमों के जारी होते ही मस्जिदों में उनको इंप्लीमेंट किया जा रहा है. पहले जहां ऑडियो का स्तर 4 से 5 के ऊपर होता था, अब उसे मशीन पर एक पर सीमित किया जा रहा है. स्पीकर नीचे कर दिए गए हैं. हर दिन अजान करने वाले मौलवी बता रहे हैं कि यह करना सकारात्मक है. लोग डिस्टर्ब नहीं हो रहे हैं. दीन से जुड़े लोग भी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं. इस मस्जिद के अलावा दूसरी मस्जिदों में भी इसे फॉलो किया जा रहा है. आवाज का स्तर कम कर दिया गया है और जब अजान होती है तो परिसर के अंदर ही रहे उसी हिसाब से स्पीकर का एंगल जो की मस्जिद की छत पर लगा है, उसे सेट किया गया है.

ईरान में की गई एक Study कहती है कि मस्जिदों पर लगे लाउड-स्पीकर की आवाज 85 Decibels से 95 Decibels तक होती है. इसके अलावा कुछ अध्ययन कहते हैं कि भारत में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर की आवाज 110 Decibels या उससे ज्यादा होती है. इनमें मस्जिदों के अलावा मन्दिर और गुरुद्वारे भी हैं. ये शोर कितना खतरनाक है, इसे आप इसी बात से समझ सकते हैं कि 70 Decibels से ऊंची आवाज इंसानों के अन्दर मानसिक बदलाव ला सकती है और ये हमारे शरीर की धमनियों में खून के प्रवाह को भी बढ़ा सकती है और कई मामलों में इससे आपका Blood Pressure भी High हो सकता है. लेकिन ये दुर्भाग्य है कि हमारे देश के लोग इस धार्मिक शोर पर खामोश बने रहते हैं. जबकि जो देश खुद को इस्लामिक बताते हैं, वहां भी इसके खिलाफ कानून बनाए जा रहे हैं.

इस समय जब रमजान का महीना चल रहा है, तब सऊदी अरब में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को काफी सीमित कर दिया गया है. वहां इस समय लाउडस्पीकर का इस्तेमाल सिर्फ अजान और इकामत के लिए हो रहा है और इस दौरान लाउडस्पीकर की आवाज एक तिहाई कम कर दी गई है. यहां बड़ी बात ये है कि सऊदी अरब एक इस्लामिक देश होते हुए अपने देश की मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर की आवाज कम कर सकता है. लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश होते हुए भी इस पर सीमित प्रतिबंध नहीं लगा सकता.

1970 के दशक से पहले भारत की मस्जिदों में लाउडस्पीकर का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता था और तब भारत के मुसलमान लाउडस्पीकर को वर्जित मानते थे और इसके इस्तेमाल का विरोध करते थे. उनका कहना था कि लाउडस्पीकर आधुनिकता का प्रतीक है और मुसलमानों को अजान के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

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