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सीबीआई ने बीरभूम हिंसा मामले में 21 लोगों के खिलाफ दर्ज की एफआईआर

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कोलकाता (मा.स.स.). बंगाल के बीरभूम हिंसा में CBI ने FIR में 21 लोगों के नाम दर्ज किए हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा, 70-80 लोगों की भीड़ ने पीड़ितों के घरों में तोड़फोड़ की। भीड़ ने 8 लोगों को घरों में बंद कर आग लगाकर जला दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CBI ने मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया है, इनमें से ज्यादातक लोग टीएमसी के कार्यकर्ता हैं। इससे पहले शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका सुनवाई करते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। एजेंसी से कहा था कि वह 7 अप्रैल तक रिपोर्ट सौंपे।

कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई की 20 सदस्यों की टीम आज बीरभूम जिले के रामपुरहाट गांव पहुंची है। टीम ने उस घर का दौरा किया जहां एक साथ 7 लोगों के शव मिले थे। सीबीआई का कहना है कि हम मामले की जांच में युद्धस्तर पर लगे हुए हैं। कोर्ट ने टीम को रिपोर्ट देने के लिए तय समय दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं, उससे इस मामले में सीबीआई जांच जरूरी हो गई है। इस घटना के बाद से बंगाल के लोगों में डर का माहौल देखने को मिल रहा है। ऐसे में सीबीआई जांच होने और पीड़ितों को न्याय मिलने से लोगों में विश्वास पैदा होगा।

​​​​बीरभूम हिंसा के 72 घंटे बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचीं थीं। ममता ने पीड़ितों से हमदर्दी दिखाई तो उनका दर्द आंखों से छलक उठा। ममता ने मृतक के परिजनों के आंसू पोछे और उन्हें पानी भी पिलाया। इसके साथ ही सीएम ने हिंसा में मारे गए लोगों के परिजन को 5 लाख रुपए का चेक दिया। बंगाल सीएम ने कहा कि आग में जल चुके घरों को सुधारने के लिए 2-2 लाख रुपए दिए जाएंगे। मरने वाले 10 लोगों के परिवारों को नौकरी दी जाएगी। उन्होंने मामले की जांच के लिए एक एसआईटी टीम बनाई थी। ममता ने कहा कि मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए कि लोग भाग गए, मैं चाहती हूं कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार किया जाए और चूक करने वाले पुलिसकर्मियों को सजा मिले।

विपक्ष इस मामले पर लगातार राज्य सरकार पर हमलावर है। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार ने ममता के बीरभूम दौरे पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि सीएम मृतकों के शवों को खरीदना चाहती हैं। इसके साथ ही भाजपा प्रमुख ने मामले की तह तक जाने के लिए CBI और NIA से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल ने बलवाइयों को फोन पर घरों में आग लगाने को कहा था। इस मामला में TMC के ब्लॉक प्रमुख की गिरफ्तारी हो चुकी है। भाजपा, CPM समेत पूरा विपक्ष अनुब्रत को भी अरेस्ट करने की मांग कर रहा है। अनुब्रत मंडल वही नेता हैं जिन्होंने बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की ओर से खेला होबे का नारा दिया था।

बीरभूम में जिन 10 लोगों को बेरहमी से हत्या की गई, उन्हें मारने से से पहले बुरी तरह पीटा गया था। फोरेंसिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। जांच टीम को जले हुए घरों में खून के धब्बे मिले हैं, जिससे पता चला है कि कि उन पर धारदार हथियार से हमला भी किया गया था। संकेत यह भी मिले हैं कि भीड़ ने लोगों को बेहोश होने तक पीटा और फिर उन्हें घर में बंद कर जिंदा जला दिया। घरों में आग लगाने के लिए पेट्रोल बम फेंके गए थे। बीरभूम जिले के रामपुरहाट में टीएमसी नेता की हत्या के बाद हिंसा भड़की थी। TMC के भादू शेख की हत्या के बाद भीड़ ने यहां करीब 10 घरों में आग लगा दी। इन घरों में 8 लोगों को बंद कर जिंदा जलाकर मार दिया गया था। मरने वालों में 2 बच्चे और 3 महिलाएं भी शामिल हैं। अब तक इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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