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कांग्रेस को मेरी नहीं नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है : प्रशांत किशोर

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नई दिल्ली (मा.स.स.). चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस ज्वॉइन करने वाली सभी अटकलों को नकार दिया है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि वो कांग्रेस ज्वॉइन नहीं करेंगे। पहले इस बारे में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर जानकारी दी। लेकिन थोड़ी ही देर बाद प्रशांत किशोर ने खुद ट्वीट कर कांग्रेस पर तंज कस दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘मैंने कांग्रेस पार्टी में शामिल होने और चुनावों की जिम्मेदारी लेने के कांग्रेस के उदार प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।’ साथ ही उन्होंने कहा, मेरी विनम्र राय है कि परिवर्तनकारी सुधारों के माध्यम से गहरी जड़ें जमाने वाली समस्याओं को ठीक करने के लिए पार्टी को मुझसे ज्यादा नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।’

प्रशांत किशोर ने अपने प्रेजेंटेशन में चुनावी अलांयस पर जोर दिया था। PK ने सुझाव दिया था कि कांग्रेस बिहार, यूपी, ओडिशा में एकला चलो और महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बंगाल में गठबंधन करे। प्रशांत इस पूरी योजना को लीड करना चाहते थे। मगर कांग्रेस हाईकमान गठबंधन पर फैसले की शक्ति खुद के पास रखना चाहता था। इतना ही नहीं, कांग्रेस कमेटी ने शर्त रखी कि पार्टी में शामिल होने के बाद PK को सभी दलों के साथ दोस्ती खत्म करनी होगी। प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी के अंदर संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव करना चाह रहे थे। PK ने सुझाव दिया था कि कांग्रेस में सभी पदों पर ‘फिक्स्ड टर्म फॉर्मूला’ लागू हो। इस फॉर्मूले के तहत प्रदेश और राष्ट्रीय अध्यक्ष 3 साल से अधिक अपने पद पर नहीं रह सकते थे।

पीके के इस फॉर्मूले पर कांग्रेस कमेटी ने ऐतराज जताया। अगर यह फॉर्मूला कांग्रेस संगठन में लागू होता, तो गांधी परिवार के साथ-साथ राहुल गांधी के कई करीबियों को संगठन में पद से बेदखल होना पड़ता। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान ने इस मांग को भी मानने से इनकार कर दिया।इसके अलावा एक समस्या कांग्रेस के नेताओं के एक गुट की ओर से प्रशांत किशोर पर सवाल खड़ा किया जाना था। कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रशांत किशोर की विश्वसनीयत पर सवाल उठाया था और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस बयान का हवाला भी दिया कि उन्होंने कहा था कि अमित शाह के कहने पर उन्हें जदयू का उपाध्यक्ष बनाया था। हालांकि, सोनिया गांधी इन सवालों को दरकिनार करके प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल करने के लिए तैयार थीं, लेकिन कुछ दूसरे बड़े और सैद्धांतिक मुद्दे पर बात अटक गई।

प्रशांत किशोर के इस बयान के बीच पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने उनसे मुलाकात की. इस मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए नवजोत सिद्धू ने कहा, ”पुराने दोस्त पीके के साथ एक अद्भुत मुलाकात हुई … पुरानी शराब, पुराना सोना और पुराने दोस्त अभी भी सबसे अच्छे हैं !!!”

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