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भारत-तिब्बत संवाद मंच, अवध प्रांत ने आयोजित की राष्ट्रीय संगोष्ठी

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लखनऊ (मा.स.स.). देश में इंजीनयिरिंग कॉलेज तो बहुत हैं लेकिन आईटीआई और पॉलीटेक्निक जैसे प्रशिक्षण संस्थान बहुत कम हैं। इसका सीधा असर देश की मैनुफैक्चरिंग क्षमता पर असर पड़ रहा है। क्योंकि सुपरविजन करने वाले ज्यादा हैं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कम। अगर किसी हराना है तो अपनी लकीर उससे बड़ी खींचनी होगी। अगर चीन को हराना है तो चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने की बजाय हमें अपनी उत्पादन क्षमता को मजबूत करना होगा।

ये बातें मेजर जनरल (रि.) अजय चतुर्वेदी ने नैमिश्रायण्य स्थित डा. बनवारी लाल शर्मा गुरुकुल में कही। रविवार को स्कूल में आयोजित भारत-तिब्बत संवाद मंच, अवध प्रांत की राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता अजय चतुर्वेदी ने कहा कि सिर्फ चीन के उत्पाद हमारी दिनचर्या में पूरी तरह से शामिल हो गए हैं। अगर यही उत्पाद देश में कम लागत पर बनना शुरू हो जाएं तो चीन पर भारत निर्भरता कम जाएगी। और इसके लिए सबसे बड़ा हथियार है शिक्षा। हमें और पूरे देश को इस दिशा में काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि जितना हम आत्मनिर्भर होते जाएंगे, पूरी दुनिया में मजबूत होते जाएंगे। कोविड जैसी महामारी के बाद अमेरिका जैसे देश घुटनों पर है और यूक्रेन जैसे विरोधी देष ने भी भारत की कई बार मदद मांगी जो दर्शाता है कि भारत मजबूती की तरफ बढ़ रहा है लेकिन अभी हमको और आगे जाना है और अपनी अंदरूनी ताकत बढ़ानी है।

संगोष्ठी में भारत-तिब्बत संवाद मंच के अध्यक्ष डॉ संजय शुक्ला ने कहा कि कैलाश और मानसरोवर हमारे देश  की पहचान हैं। सनातन धर्म के साथ-साथ जैन धर्म का भी बड़ा धार्मिक स्थल है। गुरु गोविंद सिंह जी ने भी मानसरोवर के पानी को अमृत बताया था और इसी का पानी ले जाकर स्वर्ण मंदिर के अमृत सरोवर में डाला था। कार्यक्रम का संचालन कर रहे भारत-तिब्बत संवाद मंच के राष्ट्रीय संयोजक योगेश नारायण दीक्षित ने कहा कि भारत को अंदर से मज़बूत बनाना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी नारदानंद आश्रम के पीठाधीश्वर देवेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि देश की सड़कें चाहे सोने की बना दी जाएं लेकिन अगर नागरिक अच्छा नहीं होगा तो देश का कल्याण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी खूब सीखो लेकिन अंग्रेज मत बनो।

इस अवसर पर स्कूल के निदेशक भारतेंदु त्रिवेदी ने कहा कि तिब्बत का ही पानी हमारे सिंधु और ब्रह्मपुत्र नादियों में आता है। चीन की यह कोई भी दखलंदाजी भारत को परेशान कर सकती है। उन्होंने कहा कि महराजा हरि सिंह को सरकार के दास्तावेजों में श्रीमान इंदर महेंद्र राज्यराजेश्वर महाराजाधिराज श्री हरि सिंह जी जम्मू कश्मीर, नरेश तथा तिब्बत आदि देशाधिपति कहा जाता था, इसका मतलब हरी सिंह को ना केवल जम्मू कश्मीर बल्कि अक्साई चीन समेत पूर्वी लद्दाख का भी राजा बताया गया है।

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के सरकारी दस्तेवेजों में भी दिखाया गया है, जो कैलाश पर्वत और मानसरोवर के नजदीक बसे उन गांवो तक ले जाता है। जो आज चीन के अंदर और 246 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं और नेहरू जी भी इस स्थिति से वकिफ थे । इस मौक़े पर ग्राम प्रधान कुलदीप सिंह  यादव, ग्राम प्रधान विक्रम सिंह, ग्राम प्रधान जितेंद्र सिंह और मिश्रिख पार्षद कमलाकांत मिश्रा, ज्योतिषाचार्य देव प्रकाश शुक्ल और कृष्णा मुरारी शुक्ला आदि उपस्थित रहे।

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