बुधवार , मई 18 2022 | 09:44:45 PM
Breaking News
Home / राज्य / बिहार / मुकेश सहनी को मंत्रिमंडल से बाहर करने पर राज्यपाल ने भी दी सहमति

मुकेश सहनी को मंत्रिमंडल से बाहर करने पर राज्यपाल ने भी दी सहमति

Follow us on:

पटना (मा.स.स.). बिहार में तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम में मुकेश सहनी अब राज्य मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के पत्र पर राज्यपाल फागू चौहान से उन्हें राज्य मंत्रिमंडल से पदमुक्त करने की सिफारिश कर दी। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री की सिफारिश पर मुहर लगा दी है। हालांकि देर रात तक राजभवन ने मीडिया को इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी। विदित है कि मुकेश सहनी नीतीश सरकार में भाजपा की अनुशंसा पर ही मंत्री बनाए गए थे। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सहनी को पदमुक्त करने को लेकर दो पत्र मिले।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल और भाजपा विधानमंडल दल के नेता तथा उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने पत्र भेजकर मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के तीनों विधायक अब भाजपा का हिस्सा हैं। उनका भाजपा विधायक दल में विलय हो चुका है। इसलिए अब वीआईपी के पास कोई विधायक नहीं बचा है। साथ ही, अब वीआईपी राजग का हिस्सा नहीं है। इसलिए मुकेश सहनी को पदमुक्त कर दिया जाए। भाजपा के इन दोनों पत्रों के बाद मुख्यमंत्री ने वीआईपी प्रमुख सहनी को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश राज्यपाल से कर दी।

वर्ष 2020 विधानसभा चुनाव में एनडीए में सीट शेयरिंग जदयू-भाजपा के बीच हुई थी। पहले चरण के इस बंटवारे के बाद वीआईपी का समझौता भाजपा और हम का समझौता जदयू से हुआ। एनडीए के इन दोनों मुख्य दलों ने अपने हिस्से में आई सीटों में से वीआईपी और हम को सीटें दी थीं। भाजपा से वीआईपी के समझौते में भूमिका गृहमंत्री अमित शाह की थी। अब बोचहां उप चुनाव में जब मुकेश सहनी ने अपना प्रत्याशी उतार दिया है और भाजपा कोटे से मंत्रिमंडल में रहने के बावजूद वे उसके उम्मीदवार के खिलाफ बतौर मंत्री प्रचार में जाते तो स्थिति असहज होती। उसके पहले ही उनकी सरकार से छुट्टी हो गई।

वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी का राज्य मंत्रिमंडल से हटना 20 मार्च को ही तय हो गया था। इस दिन शाम में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री व बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता नित्यानंद राय ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तथा प्रदेश इकाई की मुकेश सहनी को लेकर मत से श्री राय द्वारा सरकार के मुखिया को अवगत करा दिया गया था। इसके बाद 23 मार्च को विधानमंडल सत्र के बाद भाजपा अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल, उप मुख्यमंत्री द्वय तारकिशोर प्रसाद व रेणु देवी संग वीआईपी के तीनों विधायक- राजू सिंह, स्वर्णा सिंह और मिश्रीलाल यादव ने विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा से उनके कक्ष में मुलाकात कर भाजपा को समर्थन देने का पत्र सौंपा। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इन तीनों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी। देर रात तीनों विधायक भाजपा में शामिल भी हो गये।

विधायकों की संख्या शून्य होने के बाद से भाजपा लगातार मुकेश सहनी से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांग रही थी। प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल समेत कई विधायक, सरकार में भाजपा कोटे के मंत्री तक ने उन्हें मीडिया में दिए बयान के माध्यम से इस्तीफा देने की नसीहत दी। हालांकि 24 मार्च की सुबह प्रेस कांफ्रेंस कर सहनी ने घोषणा की थी कि वे इस्तीफा नहीं देंगे और सरकार में काम करते रहेंगे। भाजपा और वीआईपी के बीच दूरी उत्तर प्रदेश चुनाव से ही बढ़ने लगी थी। हालांकि मुकेश सहनी को भाजपा ने अपने तरीके से कई बार संदेश देने की कोशिश की। पहली बार जब वे फूलन देवी की मूर्ति लगाने के लिए यूपी गए तो उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस आना पड़ा। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान मुकेश सहनी ने भाजपा के खिलाफ जमकर प्रहार किया।

अपने प्रचार में कहा कि निषाद समाज का भाजपा शोषण कर रही है और उनको अधिकार नहीं दे रही है। यही नहीं, सहनी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी व्यक्तिगत रूप से हमलावर रहे। सहनी ने कई स्थानों पर भाजपा के खिलाफ न सिर्फ खुलकर पोस्टर-बैनर लगवाए, बल्कि भाजपा के खिलाफ वोट देने की भी अपील की। यह भाजपा को नागवार गुजरा और तभी से वह उसके निशाने पर थे। वर्ष 2020 में विस चुनाव के पहले मुकेश सहनी महागठबंधन के अंग थे। सीटों का बंटवारा जब पटना के एक होटल में चल रहा था तो प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही मुकेश सहनी ने महागठबंधन छोड़ने का ऐलान कर दिया। तेजस्वी यादव के सामने ही राजद पर खंजर भोंकने का आरोप लगाने वाले मुकेश सहनी लगातार कहते रहे कि उन्हें 25 सीट देने का वादा कर बाद में धोखा दे दिया गया। इसके बाद वे एनडीए का हिस्सा बने थे।

साल 2020 में सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर से विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद सूबे के पशुपालन मंत्री बने मुकेश सहनी इस पद पर मात्र 496 दिन ही रह सके। गत 17 नवंबर 2020 को राज्य सरकार में शामिल हुए मुकेश सहनी अब केवल विधान पार्षद ही रह गए। विधान परिषद का कार्यकाल भी इसी साल 21 जुलाई को समाप्त हो रहा है। देखना यह होगा कि वे विधान पार्षद बने रहते हैं या वे इससे भी इस्तीफा देते हैं। क्योंकि, विधान परिषद में भी वे भाजपा के कोटे से ही गए थे। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘गठबंधन आपसी समझदारी का आधार होता है। मुख्यमंत्री की यह अनुशंसा उसी के अनुकूल उठाया गया कदम है। मुकेश सहनी एनडीए में भाजपा के ही माध्यम से थे। अब जब भाजपा ने ही लिख दिया कि श्री सहनी एनडीए में नहीं हैं और उन्हें पदमुक्त कर दिया जाए तो यह आपसी समझदारी की वांछनीयता थी।’

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

निर्माणाधीन पुल का हिस्सा जरा सी बारिश में गिरा

पटना (मा.स.स.). बिहार के भागलपुर-खगड़िया के बीच गंगा नदी पर बन रहा फोरलेन पुल बारिश-आंधी …