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दिल्‍ली किसकी? 15 मई तक तय कर देगा सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली (मा.स.स.). सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह केंद्र सरकार की उस दलील पर फैसला करेगा कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के विवाद को निपटारे के लिए पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा जाए. इस याचिका का आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने कड़ा विरोध किया था. केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की थी कि दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के विवादित मसले को संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए.

दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का मसला संविधान पीठ को सौंपने पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने संकेत दिया है कि अगर मामला 5 जजों की बेंच को भेजा जाता है, तो भी सुनवाई 15 मई तक पूरा करने की कोशिश की जाएगी. दिल्ली सरकार अधिकारियों पर पूर्ण नियंत्रण की मांग कर रही है. अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार मांग रही दिल्ली सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एन वी रमना,जस्टिस सूर्य कांत और हिमा कोहली कि बेंच में लगा. केंद्र सरकार के सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि स्थिति अब बदल चुकी है. यह मसला पिछले साल गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली एक्ट (GNCTD Act) में किए गए संशोधन से भी जुड़ा है.

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