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नरेश पटेल का भाजपा, कांग्रेस व आप तीनों चाहती हैं समर्थन

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अहमदाबाद (मा.स.स.). इसी साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले तमाम राजनीतिक पार्टियां अभी से अपनी रणनीति बनाने में जुटी हैं। हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पंजाब फतह करने वाली आम आदमी पार्टी भी गुजरात में इस बार दमखम के साथ उतरने को तैयार है। हालांकि उससे पहले आप अपने पाले में गुजरात के बड़े पाटीदार नेता नरेश पटेल को लाना चाहती है। आप के अलावा गुजरात की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी नरेश पटेल को अपने साथ लाने के प्रयास में है। उनका प्रभाव सौराष्ट्र क्षेत्र के 11 जिलों के अलावा सूरत में भी बहुत ज्यादा है।

दरअसल श्री खोडलधाम ट्रस्ट (एसकेटी) के अध्यक्ष और गुजरात में पाटीदार समुदाय के एक प्रभावशाली सदस्य नरेश पटेल ने सोमवार को कहा था कि वह राजनीति में शामिल होने के इच्छुक हैं, लेकिन निर्णय राज्य स्तरीय सर्वेक्षण के परिणाम के आधार पर लेंगे। श्री खोडलधाम ट्रस्ट (एसकेटी) राजकोट से लगभग 60 किलोमीटर दूर कागवाड़ में, लेउवा पाटीदार समुदाय की संरक्षक देवी खोडियार मंदिर का प्रबंधन करता है। पाटीदार समाज के चर्चित चेहरे नरेश पटेल को कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया है। कांग्रेस के इस कदम से राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है। रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले साल दिसंबर में खुद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नरेश पटेल से मुलाकात की थी। गहलोत ने उनसे गुजरात की राजनीति में भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की थी।

गहलोत के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गुजरात कांग्रेस के दिग्गज नेता भरत सिंह सोलंकी भी पाटीदार समाज की कुलदेवी खोडल माता के मंदिर पहुंचकर नरेश पटेल से मिले और उन्हें कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया। वहीं गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकुर ने भी नरेश पटेल को सार्वजनिक रूप से कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया। गुजरात विधानसभा में नेता विपक्ष सुखराम राठवा ने भी कहा है कि नरेश पटेल के लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं। हालांकि अभी तक नरेश पटेल की तरफ से कांग्रेस में जाने को लेकर कोई बयान नहीं आया है। लेकिन चर्चा है कि नरेश पटेल कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।

चुनावों से पहले भाजपा भी नरेश पटेल को अपने पाले में लाने की कोशिश में है। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल ने नरेश पटेल को लेकर कहा, “कोई भी अगर किसी पार्टी में जाना चाहेगा, तो उसे थोड़ा स्टेटस तो चाहिए ही। अब स्टेटस कौन सी पार्टी दे सकती है, ये सब जवाब तो उन्हें मिल चुके होंगे। अभी स्टेटस एक ही पार्टी दे सकती है, वह है बीजेपी। तो इसके सिवा वे कहीं नहीं जाने वाले।”

राजनीति में जाने की इच्छी जताने के बाद  नरेश पटेल ने कहा कि कुछ लोगों का मानना ​​है कि एसकेटी में वह अपने वर्तमान पद से समुदाय की सेवा करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार राजनीति में शामिल होने का मतलब एसकेटी का अपना पद छोड़ना भी होगा। पटेल ने राजकोट में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हालांकि, बड़ी संख्या में युवाओं का मानना ​​है कि उन्हें ट्रस्ट में अपना पद छोड़े बिना राजनीति में प्रवेश करना चाहिए, जिसका निर्णय ट्रस्टियों द्वारा लिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘खोडलधाम (ट्रस्ट) की एक सर्वेक्षण समिति अपने नेटवर्क के माध्यम से जिला, तालुका और ग्राम स्तर पर काम कर रही है। समिति के सदस्य लोगों की राय लेने के लिए घर-घर जाते हैं। गांव स्तर पर लोगों के सुझाव लिए जा रहे हैं (इस पर कि क्या मुझे राजनीति में आना चाहिए और किस राजनीतिक दल में) यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसमें कुछ समय लगेगा।’’ उन्होंने कहा कि वह अप्रैल के अंत तक निर्णय लेने की स्थिति में होंगे।

नरेश पटेल ने हाल ही में आम आदमी पार्टी की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि गुजरात में कभी कोई तीसरा पक्ष नहीं रहा, लेकिन जिस तरह AAP आगे बढ़ रही है, उससे लगता है कि भविष्य में गुजरात में उसका दबदबा रहेगा। नरेश पटेल ने कहा था, ‘गुजरात में एंट्री के बाद आप ने बहुत अच्छा काम किया है। पार्टी का भविष्य उज्ज्वल और कार्यशैली नेक और साफ है।’

इसी दौरान खबरें आईं थीं कि पंजाब से आम आदमी पार्टी जिन पांच व्यक्तियों को राज्यसभा भेजना चाहती थी उनमें एक नाम नरेश पटेल का भी था। लेकिन नरेश पटेल नहीं माने। बाद में आम आदमी पार्टी ने पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा, आईआईटी के प्रोफेसर संदीप पाठक, शिक्षाविद् अशोक कुमार मित्तल और उद्योगपति संजीव अरोड़ा को राज्यसभा भेजा। वे सभी निर्विरोध चुने गए।

पटेल भले ही सक्रिय राजनीति में न रहे हों लेकिन पिछले एक दशक में उनके नाम की खासी चर्चा रही है। खोडलधाम पर भव्य मंदिर के निर्माण को लेकर अग्रणी रहे नरेश पटेल का पाटीदार समाज में जबरदस्त वर्चस्व है। नरेश पटेल जिस पाटीदार समुदाय के नेता हैं वह गुजरात की राजनीति में हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहा है। लेउवा पटेल, सौराष्ट्र और कच्छ के इलाके में ज्यादा, राजकोट, जामनगर, अमरेली, भावनगर, जूनागढ़, पोरबंदर, सुरेंद्रनगर जिलों में बड़ी संख्या में पाटीदार समाज के लोग रहते हैं।

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