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किरोड़ी सिंह बैंसला का लम्बी बीमारी के बाद निधन

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जयपुर (मा.स.स.). गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का गुरुवार सुबह जयपुर में निधन हो गया। गुर्जर नेता बैंसला के निधन से गुर्जर समाज में शोक की लहर फैल गई। समाज के लोग अपने नेता को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि देने के लिए उनके निवास पर पहुंच रहे हैं। आज ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का जन्म करौली जिले के मूंडिया गांव में 12 सितंबर 1939 को हुआ था।कर्नल किरोड़ी जाति से गुर्जर हैं। उनके पिता का नाम बच्चू सिंह बैसला हैं। किरोड़ी सिंह बैंसला की पत्नी का नाम रेशम देवी गुर्जर है। उनकी एक बेटी सुनीता बैसला इनकम टैक्स विभाग में कमिश्नर है। एक बेटा दौलत सिंह बैसला सेना में ब्रिगेडियर है जबकि एक बेटा जय सिंह बैंसला असम राइफल में डीआईजी है। किरोड़ी सिंह बैंसला का एक बेटा विजय बैसला निजी कंपनी में इंजीनियर है।

बैंसला की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। इसके उन्होंने भरतपुर और जयपुर के महाराजा कॉलेज में पढ़ाई की। वे महुआ में अंग्रेजी व्याख्याता के पद पर रहे। 2 साल व्याख्याता के पद पर नौकरी करने के बाद पिता के फौज में होने के चलते उनका रूझान भी सेना में जाने का हुआ और आखिर वो भी सिपाही के रूप में सेना में भर्ती हो गए। बैंसला सेना की राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए थे और सेना में रहते हुए 1962 के भारत-चीन और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बहादुरी से वतन के लिए जौहर दिखाया। सेना में रहते हुए बैंसला एक बार पाकिस्तान के युद्धबंदी भी रहे।

बताया जाता है कि बैंसला सेना में दो उपनामों से जाने जाते थे। उनके सीनियर्स उन्हें ‘जिब्राल्टर का चट्टान’ और साथी कमांडो ‘इंडियन रेम्बो’ कह कर बुलाते थे। सेना में अपनी जांबाजी के दम पर एक मामूली सिपाही से तरक्की पाते हुए कर्नल की रैंक तक पहुंच थे। 1991 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद 1994 में उनकी धर्मपत्नी ग्राम पंचायत मुड़िया की सरपंच बनी। इसके बाद 1996 में उनकी धर्मपत्नी का निधन हो गया था। कर्नल बैंसला अपने बेटे विजय के साथ हिण्डौन के वर्धमान नगर में रहते थे। सेना से रिटायर हो कर कर्नल बैंसला लौटे तो उन्होंने गुर्जर समुदाय के हकों के लिए अपनी लड़ाई शुरू की।

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