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Tag Archives: खिलाफत आंदोलन

तुर्की में फिर शुरु हुआ खलीफा और गाजी विचारधारा के विरुद्ध विद्रोह

– सारांश कनौजिया तुर्की की खलीफा और गाजी विचारधारा एक बार फिर सर उठा रही है। जब तक यह विचारधारा दूसरे देशों को कट्टर इस्लामिक मान्यताओं के आधार पर चलाने का प्रयास कर रही थी, विरोध कम था, लेकिन जैसे ही इस विचारधारा ने बदले हुये तुर्की के मानवाधिकारों को …

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15 अगस्त 1947 से पहले का भारत – प्रथम संस्करण

15 अगस्त 1947 से पहले का भारत – प्रथम संस्करण     – सारांश कनौजिया  जब हम भारत की स्वतंत्रता के इतिहास की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान अंग्रेजों की गुलामी के काल पर जा कर रूक जाता है। किन्तु भारत इससे पहले भी गुलाम रहा है। विभिन्न इस्लामिक …

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महात्मा गांधी ने भारत में असहयोग आंदोलन के नाम से चलाया था खिलाफत आंदोलन

– सारांश कनौजिया 30 जनवरी को मोहनदास कर्मचंद गांधी उपाख्य महात्मा गांधी की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या हो गयी। देश में क्रांतिकारियों को अपना आदर्श मानने वाले बहुत से लोग महात्मा गांधी से असहमत हो सकते हैं, लेकिन इस कारण उनकी हत्या को सही नहीं कहा जा सकता। वैसे तो महात्मा गांधी के …

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खिलाफत नेतृत्व: भिन्नता में एकजुटता

– डॉ. श्रीरंग गोडबोले कौन थे वे लोग जिन्होंने ख़िलाफत आंदोलन का नेतृत्व किया? इस्लाम और अखिल-इस्लामवाद का पाठ वे कहाँ से पढ़े थे? उनके अलग-अलग रास्तों ने उन्हें एक सामान्य लक्ष्य तक कैसे पहुंचाया? प्रथम विश्व युद्ध से लेकर खिलाफत आंदोलन (1919-24) तक की घटनाओं को समझने के लिए …

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खिलाफत आंदोलन : पूर्ववर्ती सौ वर्ष

– डॉ. श्रीरंग गोडबोले खिलाफत आंदोलन(1919-1924) मजहबी किताबों द्वारा स्वीकृत ऐसा आंदोलन था, जिसका भारत मे प्रारंभ उसी  समय हो गया था, जब पहले  इस्लामी आक्रमणकारी ने भारत की जमीन पर कदम रखा। आधुनिक काल में ओटोमन खलीफा की चर्चा  सूफियों, उलेमा, मध्यवर्गीय मुस्लिम बुद्धिजीवियों, मुस्लिम प्रेस और आम मुस्लिमों …

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खिलाफत: मजहबी-किताबी स्वीकृति एवं ऐतिहासिक पूर्वाधार

– डॉ.श्रीरंग गोडबोले किसी दीनदार मुस्लिम के लिए, सिद्धांत (तालीम-व-तरबियत) विवेक पर हावी होता है। इस्लामी सिद्धांत के निम्न तीन स्रोत हैं- कुरान, हदीस (पैगंबर मुहम्मद के कथनी एवं व्यवहार का आधिकारिक विवरण) तथा सीरत (पैगंबर मुहम्मद की जीवनी) या सुन्नत (पैगंबर मुहम्मद द्वारा दी गई पद्धति या परंपरा)। व्यक्तिगत …

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खिलाफत आंदोलन : प्रासंगिकता और विमर्श

– डॉ. श्रीरंग गोडबोले खिलाफत आंदोलन (1919-1924) भारतीय मुस्लिमों के बीच उत्पन्न हुए  एक तनाव का परिणाम था, जो प्रथम विश्व युद्ध के अंत में तुर्की ओटोमन साम्राज्य के विखंडन और तुर्की में खलीफा पद की समाप्ति की आशंका के परिणामस्वरूप प्रारम्भ हुआ था। खिलाफत आंदोलन की सर्वप्रमुख मांग खलीफा …

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