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इजरायल-हमास युद्ध पर युद्धविराम का प्रस्ताव अमेरिका के वीटो के बाद गिरा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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वाशिंगटन. संयुक्त राज्य अमेरिका ने सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव पर अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर दिया जिसमें गाजा में तत्काल मानवीय युद्धविराम और सभी बंधकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की गई थी। मतदान के पक्ष में कुल 13 वोट पड़े। इसके विरोध में 1 वोट यानि अमेरिका का वीटो था। यूके ने वोटिंग से खुद को अलग रखा। हमास ने अमेरिका के कदम की निंदा की। हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, हमास गाजा में युद्धविराम की मांग वाले मसौदा प्रस्ताव के खिलाफ अमेरिकी वीटो की निंदा करता है। हमास ने इसे अनैतिक और अमानवीय बताया। इज्जत-अल-रेशिक समूह के राजनीतिक सदस्य ने कहा कि, अमेरिका युद्धविराम में बाधा डाल रहा है। ऐसा करना हमारे लोगों को मारने और नरसंहार करने में शामिल होना है।

अमेरिका का कहना है कि वो गाजा में तत्काल युद्धविराम के आह्वान का समर्थन नहीं करता है। संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत और उप स्थायी प्रतिनिधि रॉबर्ट ए वुड ने कहा कि ऐसा करना अगले युद्ध के लिए बीज बोने जैसा होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका एक स्थायी शांति का दृढ़ता से समर्थन करता है जिसमें इजरायल और फलस्तीनी दोनों शांति और सुरक्षा में रह सकते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका तत्काल युद्धविराम के आह्वान का समर्थन नहीं करता क्योंकि, हमास को शांति और दो-राज्य समाधान में कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर इजरायल ने आज एकतरफा अपने हथियार डाल दिए, जैसा कि कुछ सदस्य देशों ने आह्वान किया है तो हमास ऐसे ही अपनी कामों को अंजाम देता रहेगा। वहीं हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय की नवीनतम गणना के अनुसार इजरायली हमलों में फलिस्तीनी क्षेत्र में 17,487 लोग मारे गए हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।