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फिल्म आई किल्ड बापू में गोडसे को नायक बताया गया, हो एफआईआर : कांग्रेस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. फिल्म ‘आई किल्ड बापू’ को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे।  अब इस फिल्म के खिलाफ कांग्रेस प्रवक्ता भरत सिंह ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। भरत सिंह ने मुंबई के विलेपार्ले पूर्व पुलिस स्टेशन में फिल्म के खिलाफ शिकायत दी है। कांग्रेस प्रवक्ता ने इस शिकायत में लिखा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने हेतु निवेदन है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर आई किल्ड बापू’ नामक फ़िल्म 29 सितंबर को ZEE5 ओटीटी पर रिलीज होने से समाज में भारी विवाद पैदा हो गया है और विद्वेष की भावना फैल गई है।

“गोडसे को नायक के रूप में चित्रित किया गया”

कांग्रेस प्रवक्ता ने अपनी शिकायत में लिखा है, “क्योंकि यह फ़िल्म महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे द्वारा विशेष अदालत में गांधी की हत्या के पीछे का कारण बताने वाले बयान पर आधारित है। महात्मा गांधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे को फांसी की सजा दी गई थी। इस फिल्म में महात्मा गांधी के हत्यारे को नायक के रूप में चित्रित किया गया है, जो अस्वीकार्य है। देश की छवि गांधी और उनकी अहिंसा की विचारधारा से जानी जाती है। इस फिल्म के रिलीज होने पर हम उसका विरोध करते हैं और उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं।”

प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और एक्टर पर हो FIR
मुंबई के विलेपार्ले पुलिस थाने में दी गई शिकायत में कांग्रेस ने मांग की है कि “I Killed Bapu” फिल्म के निर्माता विकास प्रोडक्शन की सरला अशोक सराओगी और राहुल शर्मा, डायरेक्टर हैदर काजमी, फिल्म में काम करने वाले कलाकार और चैनल के एडिटर व प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।