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ओटीटी अभिनेता वीर दास ने को मिला बेस्ट कॉमेडी श्रेणी में एमी अवॉर्ड

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. पॉपुलर एक्टर और कॉमेडियन वीर दास ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने 51वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में बेस्ट कॉमेडी के लिए अवॉर्ड जीता है। एमी अवॉर्ड्स में शेफाली शाह और जिम सर्भ को भी नॉमिनेशन मिला था, पर वो दोनों अवॉर्ड जीतने से चूक गए। वहीं वीर दास को उनके नेटफ्लिक्स स्पेशल शो ‘वीर दास: लैंडिंग’ के लिए बेस्ट कॉमेडी का एमी अवॉर्ड मिला है। मालूम हो कि यह दूसरी बार था जब Vir Das को इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन मिला था, पर जीत पहली थी। वीर दास के शो के साथ-साथ ब्रिटिश कॉमेडी सीरीज Derry Girls-Season 3 को भी बेस्ट कॉमेडी का अवॉर्ड मिला।

वीर दास ने रचा इतिहास, आलोचना के बाद करने वाले थे सुसाइड

वीर दास को जब इससे पहले एमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला था, तो कॉमेडियन ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने बताया था कि अमेरिका में किए गए शो में उन्होंने जो कविता बोली थी, उस पर जो आलोचना हुई, उसके कारण वह सुसाइड करने के बारे में सोचने लगे थे। उन्होंने पोस्ट में लिखा था, ‘जिस रात मुझे आतंकवादी कहा गया, उसी रात मैं एमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हो गया।’

एमी अवॉर्ड पाकर वीर दस की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने कहा, ”वीर दास: लैंडिंग’ के लिए बेस्ट कॉमेडी के लिए इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड पाकर मैं बहुत आभारी हूं। यह मेरी टीम और नेटफ्लिक्स के लिए है जिनके बिना यह संभव नहीं होता। यह जर्नी बहुत ही असाधारण रही है, और नेटफ्लिक्स के साथ मेरे पांचवें स्पेशल के लिए यह तारीफ जीतना जुनून, दृढ़ता और दुनिया भर के लोगों के अटूट समर्थन की बुलंदी जैसा लगता है, जिन्होंने ‘वीर दास: लैंडिंग’ को इतना प्यार दिया है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह अवॉर्ड सिर्फ मेरे काम की मान्यता नहीं, देश की विविध कहानियों और आवाज़ों का जश्न है। वो कहानियां जो हमें हंसाती हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात, एकजुट करती हैं। यह इंडिया के लिए, इंडियन कॉमेडी के लिए और बड़े पैमाने पर आर्टिस्टों की कम्युनिटी के लिए है।’

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।