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हमास आतंकवादियों को बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की हत्या पर देता है 10,000 डॉलर और अपार्टमेंट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

गाजा. इजरायल और हमास के बीच जंग थमती नजर नहीं आ रही है. अब तक दोनों तरफ से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 7 अक्टूबर को हमास की तरफ से इजरायल हुए हमले के बाद आतंकियों ने निर्दोष लोगों को अपनी निशाना बनाया था. बताया जा रहा है कि कस्बों पर छापा मारने वाली हमास सेना को बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों को मारने और अपहरण करने के स्पष्ट और स्पष्ट निर्देश मिले थे. इस बात का खुलासा हमास के आतंकियों ने किया है. बताया जा रहा है कि अपहरण और हत्या के लिए इनाम का ऐलान भी किया गया था. बता दें कि हमास के आतंकियों ने इजरायल के अलग-अलग इलाकों पर 5000 से ज्यादा रॉकेट दागे थे.

बंधकों के लिए पुरस्कार

आतंकवादियों ने खुलासा किया कि गाजा में, बंधकों को लाने वाले किसी भी व्यक्ति को पुरस्कार देने का वादा किया गया था, जिसमें एक अपार्टमेंट और 10,000 डॉलर की राशि शामिल थी.

कमजोर लोगों को निशाना बनाना

बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों का अपहरण करने के स्पष्ट और चिंताजनक निर्देश दिए गए थे. ये खुलासे आबादी के सबसे कमजोर सदस्यों को नुकसान पहुंचाने के जानबूझकर किए गए इरादे की ओर इशारा करते हैं.

अपहरण का आदेश

आतंकवादियों ने खुलासा किया कि उन्हें जितना संभव हो उतने कैदियों का अपहरण करने का आदेश दिया गया था. उनकी क्रूरता निर्दोष पालतू जानवरों को गोली मारने तक भी बढ़ गई. हमास के एक आतंकवादी ने वीडियो पर कहा कि उसका कुत्ता बाहर आया, मैंने उसे गोली मार दी.

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लाश को मारी गोलियां

आतंकवादियों ने 15 वर्षीय लड़की के साथ सेल्फी लेने की बात स्वीकार की जिसका उन्होंने अपहरण किया था. इसके अलावा, वे पीड़ितों को मरने के बाद भी दोबारा गोली मारते हैं. हमास के एक आतंकवादी ने कहा कि उसका शव फर्श पर पड़ा था, मैंने उसे गोली मार दी. कमांडर मुझ पर चिल्लाया कि मैं एक लाश पर गोलियां क्यों बर्बाद कर रहा हूं. यह भी पाया गया कि हमास की सैन्य शाखा के वरिष्ठ कमांडर (एमपी रैंक और ऊपर) पीछे रह गए, वह अपार्टमेंट में छिप गए, जबकि उन्होंने अपने लोगों को इज़राइल में लड़ने और मरने लिए भेजा.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।