लोड हो रहा है...

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के निशाने पर अभी भी हैं हमास के बड़े आतंकवादी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

गाजा. हमास के साथ संघर्षविराम के बीच भी इजरायल हमास के आतंकवादियों को नहीं बख्शेगा. इजरायल ने इसका ऐलान कर दिया है. माना जा रहा था कि इस सीजफायर के साथ हमास के आतंकवादियों को भी इजरायली रडार से कुछ राहत मिलेगी. लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है. हमास और इजराइल के बीच चार दिवसीय युद्धविराम जारी है.

बंधकों के दो समूहों को रिहा किया गया
सीजफायर के दौरान बंधकों के दो समूहों को शुक्रवार और शनिवार को रिहा किया गया है. इजरायली सरकार ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद को हमास के वरिष्ठ आतंकवादियों की हत्या करने का आदेश दिया है. एक समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि इजरायल की तरफ  से युद्धविराम के दौरान और उसके बाद भी हमास के नेताओं को कोई छूट मिलेगी.

नेताओं के नाम लेकर कहा- वे जल्द ही मारे जाएंगे
इस संबंध में इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने मीडिया को साफ रूप में बताया कि हमास के वरिष्ठ नेता, इस्माइल हनीयेह, खालिद मशाल, याह्या सिनवार और मोहम्मद दीफ अंतिम दिन गिन रहे हैं और वे जल्द ही मारे जाएंगे, भले ही वे दुनिया के किसी भी कोने में छुपे हों. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर को पुष्टि की है कि इन नेताओं को उसकी धरती पर नहीं मारा जाएगा, कतर मध्यस्थता वार्ता में प्रवेश के लिए एक आश्वासन चाहता है.

इजरायल खलील अल-हया को भी निशाना बना रहा है, जो हमास के पोलित ब्यूरो का सदस्य है और याह्या सिनवार और मोहम्मद दीफ के बाद सैन्य अभियानों में दूसरे स्थान पर है. 7 अक्टूबर के नरसंहार और दक्षिणी इज़राइल में तबाही के लिए जिम्मेदार यही दो व्यक्ति हैं.

- Advertisement -

साभार : जी न्यूज़

भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

https://www।amazon।in/dp/9392581181/

https://www।flipkart।com/bharat-1857-se-1957-itihas-par-ek-drishti/p/itmcae8defbfefaf?pid=9789392581182

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।