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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले रूस में उठी भव्य हिन्दू मंदिर बनाने की मांग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मास्को. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुस दौरे से पहले मॉस्को में भी एक विशाल मंदिर बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. रुस में रहने वाले भारतीयों के एक संगठन ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को पत्र लिखकर मंदिर बनाने के लिए मॉस्को में ज़मीन देने की मांग की है. इंडियन बिजनेस अलायंस के अध्यक्ष सामी कोतवानी ने बताया कि आबूधाबी की तरह मॉस्को में भी विशाल मंदिर बनाने की योजना है. सामी कोतवानी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को संबोधित एक वीडियो भी जारी किया है. इस वीडियो में कोतवानी ने कहा कि इस मंदिर का वित्त पोषण पूरी तरह से निजी आधार पर होगा.

भारतीय प्रवासियों के लिए आध्यात्मिक केंद्र

उन्होंने कहा कि यह मंदिर न सिर्फ भारतीय प्रवासियों के लिए आध्यात्मिक केंद्र होगा बल्कि बहुराष्ट्रीय भारतीय समर्थन में रुची रखने वाले सभी लोगों के लिए सांस्कृतिक केंद्र होगा. इस तरह मॉस्को में हिंदू मंदिर न केवल भारतीयों के लिए एकता और आकर्षण का केंद्र बनेगा. बल्कि दोनों रूस और भारत के बीच मजबूत संबंधों का प्रतीक भी बनेगा.

मॉस्को के आकर्षण का केंद्र

सामी कोतवानी ने कहा कि इसके अलावा यह मंदिर राजधानी मॉस्को के आकर्षण का केंद्र भी बन जाएगा. इसकी वजह से भारतीय पर्यटन की संख्या में बृद्धि होगी, जिससे रूस संघ की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.

रूस में हिंदू मंदिर बनाने की सहमति

कोतवानी ने पुतिन को संबोधित करते हुए कहा कि मॉस्को में पहले हिंदू मंदिर का निर्माण हमारी संस्कृति के आपसी समन्वय का प्रतीक बनेगी, जो ब्रिक्स प्लस के विकास के विचार की नीति है. रूस में हिंदू मंदिर बनाने की सहमति देना अक्टूबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन की पहली बड़ी खबर होगी.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।