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जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने यूक्रेन को 650 मिलियन यूरो की सैन्य मदद का किया वादा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कीव. जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने अचानक यूक्रेन दौरे पर कीव पहुंचकर सबको चौंका दिया है. बताया जा रहा है उनका यह दौरा पहले से सुनियोजित नहीं था और न ही इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपने दौरे की जानकारी दी. शोल्ज ने कीव पहुंचने से पहले ही यूक्रेन को 650 मिलियन यूरो की सैन्य मदद का वादा किया है. सोमवार को उन्होंने अपने दौरे की जानकारी देते हुए एक बयान में कहा है कि यूक्रेन को यह सैन्य मदद इसी महीने के अंत तक मिल जाएगी. शोल्ज का दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में ट्रंप सरकार की वापसी हो रही है और उन्होंने इस जंग को एक दिन में खत्म करवाने का वादा किया है.

यूक्रेन की 20% जमीन पर रूस का कब्जा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी सेना यूक्रेन में तेज़ी से आगे बढ़ रही है और इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने नाटो से सुरक्षा गारंटी की मांग की है जिससे वह रूसी आक्रमण से देश की रक्षा कर सकें. दरअसल एक ओर यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, तो वहीं दूसरी ओर रूसी सेना ने यूक्रेन के करीब 20 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर लिया है.

जर्मनी पर भरोसा कर सकता है यूक्रेन- शोल्ज

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से जर्मन चांसलर का यह दूसरा कीव दौरा है. शोल्ज ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि, ‘मैं आज ट्रेन के जरिए कीव पहुंचा हूं, एक ऐसा देश जो एक हजार दिनों से रूस के आक्रमण के खिलाफ अपनी रक्षा कर रहा है. मैं यहां जमीनी स्तर पर यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूरोप में जर्मनी, यूक्रेन का सबसे मजबूत समर्थक है और रहेगा. यूक्रेन, जर्मनी पर भरोसा कर सकता है, हम कहते हैं वो करते हैं और जो करते हैं वहीं कहते हैं.’

जेलेंस्की ने की थी शोल्ज की आलोचना

कुछ दिनों पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जर्मनी चांसलर की आलोचना की थी क्योंकि उन्होंने इस जंग की शुरुआत के बाद पहली बार रूस के राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बात की थी. जेलेंस्की ने ओलाफ शोल्ज के इस कदम को ‘पैंडोरा बॉक्स’ को खोलने जैसा बताया था और कहा था कि इससे रूस को अलग-थलग करने के वैश्विक प्रयास कमजोर होंगे.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।