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तीन तलाक पीड़िताएं रामलला को अपने हाथों से बने वस्त्र करेंगी भेंट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. राममंदिर निर्माण में आस्था के साथ सामाजिक समरसता भी हिलोरें ले रही है…रामलला से प्रेम में धार्मिक बंधन छूट रहे हैं। तीन तलाक पीड़िताएं 26 जनवरी के बाद रामलला के दर्शन करने पहुंच रही हैं। वे न सिर्फ रामलला को निहारेंगी, बल्कि अपने हाथों से बना वस्त्र भी भेंट करेंगी। यह वस्त्र बरेली की मशहूर जरी जरदोजी से तैयार हो रहा है।

मंदिर निर्माण में योगदान देने के लिए तीन तलाक के खिलाफ मुखर मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाएं अभियान चलाकर सहयोग राशि जुटा रही हैं। ये महिलाएं बरेली, बदायूं, रामपुर, मुरादाबाद, मेरठ, प्रयागराज समेत 30 जनपदों से चंदा जुटाएंगी। फरहत कहती हैं, जो भी राशि एकत्रित होगी, उसे वे राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप देंगी। कई वर्षों से सामाजिक कार्यों से जुड़ीं फरहत कहती हैं, ईदगाह के लिए हिंदू समुदाय ने जमीन दान में दी, तो हम मंदिर निर्माण में सहयोग क्यों नहीं कर सकते?

मोती जड़ित होंगे वस्त्र
रामलला को जो वस्त्र सौंपे जाएंगे, वे मोती जड़ित होंगे। महिलाओं का कहना है कि उन्हें ट्रस्ट से अनुमति मिले, तो वे हर साल रामलला के लिए अपने हाथ से वस्त्र तैयार करेंगी। दरअसल, मेरा हक फाउंडेशन से जुड़ी महिलाएं जरी जरदोजी का काम करती हैं। इसका बारीक काम हाथ से ही किया जाता है।

मुस्लिम समाज से लगातार मिल रहा सहयोग
मंदिर निर्माण के लिए संघ के अभियान को कई जगहों पर मुस्लिम समाज का खुलकर सहयोग मिला। दो साल पहले पाटन, नेपाल के डॉक्टर दंपती हामिद मंसूरी और मुमताज ने दान देने के साथ ही रामलला के दर्शन किए थे। तमिलनाडु के डब्ल्यूएस हबीब ने दान देते हुए कहा कि वह हिंदू-मुसलमान में सौहार्द देखना चाहते हैं। हाल में काशी प्रांत के 27 जिलों से 4 हजार से अधिक मुसलमानों ने सहयोग राशि दी।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।