लोड हो रहा है...

हाथरस हादसे में आयोजकों व सेवादारों पर एफआईआर, फिलहाल बाबा का नाम नहीं

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ कस्बे के फुलरई गांव में मंगलवार को सत्संग में हुए बड़े हादसे से 121 लोगों की मौत हो गई. यहां साकार हरि बाबा का सत्संग चल रहा था. भोले बाबा फरार हैं और पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई है.  सत्संग समाप्त होने के बाद यहां से जैसे भी भीड़ निकलना शुरू हुई तो भगदड़ मच गई. अब इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. एफआईआर के मुताबिक 80 हजार लोगों की अनुमति के बाद ढाई लाख लोग सत्संग में शामिल हुए.

आयोजकों ने संख्या प्रशासन से छुपाकर भीड़ बुलाई. एफआईआर के मुताबिक आयोजकों ने साक्ष्य भी छुपाए. सूत्रों के अनुसार हाथरस मामले में बाबा का नाम fir में जल्द जोड़ा जा सकता है.  या पुलिस एक और fir भी बाबा को नामजद करते हुए दर्ज कर सकती है.

हाथरस हादसे में एफआईआर

हाथरस हादसे में एफआईआर दर्ज की गई है. इसके मुताबिक 80 हजार लोगों की अनुमति मांगी गई थी जबकि लोगों की संख्या करीब ढाई लाख थी. आरोप है है कि भीड़ जब दब रही थी तब सेवादारों और आयोजको ने डंडों से जबरदस्ती रोका.  भगदड़ के दौरान आयोजक और सेवादारों ने कोई सहयोग नहीं किया. Fir के अनुसार ढाई लाख की भीड़ महत्वपूर्ण है कि बाबा को नामजद नहीं किया गया है. सभी सेवादारों ने डंडों से जबरदस्ती रोका है.

लगी हैं ये धाराएं

1 Sections (धारा (एँ)) भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस), 2023 105 2 भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस), 2023 3 110 भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस), 2023 126(2) 4 भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस), 2023 5 223 भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस), 2023 238

- Advertisement -

हाईकोर्ट को चिठ्ठी

हादसे को लेकर हाईकोर्ट को चिठ्ठी लिखी गई है.  चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन भेजा गया है. हादसे की सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग की गई है. दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है.

साभार : जी न्यूज

भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

https://www.amazon.in/dp/9392581181/

https://www.flipkart.com/bharat-1857-se-1957-itihas-par-ek-drishti/p/itmcae8defbfefaf?pid=9789392581182

- Advertisement -

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।