लोड हो रहा है...

लेबनान से हिजबुल्लाह ने इजरायल पर किया 50 रॉकेटों से किया हमला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बेयरूत. हमास चीफ इस्माइल हानिया के मारे जाने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव पहले से ज्यादा बढ़ गया है। इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ संघर्ष का सामना कर रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच हिजबुल्लाह ने रविवार को दक्षिणी लेबनान से इजरायल की ओर लगभग 50 रॉकेट दागे हैं। ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह ने कहा कि उत्तरी इजरायल में बेत हिलेल (Beit Hillel) पर उसका हमला लेबनान में कफार केला (Kfar Kela ) और डेर सिरियाने (Deir Siriane) पर इजराइली हमलों का जवाब था।

लेबनान ने फुआद शुक्र के मारे जाने का लिया बदला

लेबनान ने दावा किया था कफार केला और डेर सिरियाने में हुए इजरायली हमले उसके कई नागरिक घायल हुए थे। हिजबुल्लाह के शीर्ष कमांडर फुआद शुक्र ( Fuad Shukr) भी मंगलवार शाम को इजरायली के हवाई हमले में मारा गया था।

हिजबुल्लाह ने दागे 50 रॉकेट

सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इजरायल वार रूम (Israel War Room) ने हवाई हमलों का एक वीडियो डाला है। इस वीडियो के साथ ही लिखा कि उत्तरी इजरायल में रॉकेट हमलों को आयरन डोम से रोका गया है। वीडियो में दिख रहे ये वहीं हवाई हमले हैं, जो लेबनान के हिजबुल्लाह द्वारा किए गए हैं। इजरायल इन हवाई हमलो को आयरन डोम से रोक रहा है।

ईरान और हमास के साथ लेबनान भी जंग में कूदा

बता दें कि ईरान और हमास ने इस्माइल हानिया की हत्या के लिए इजरायल को सीधे तौर पर दोषी ठहराया है। दोनों ने हिजबुल्लाह के साथ मिलकर इजरायल से बदला लेने की कसम खाई है। हानिया की मौत पर इजरायल ने न तो जिम्मेदारी की पुष्टि की है और न ही इनकार किया है।

- Advertisement -

इजरायल ने हानिया को मारने का लिया था संकल्प

मालूम हो कि इजरायल ने सात अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल पर हमास के हमले के लिए इस्माइल हानिया और अन्य हमास नेताओं को मारने का संकल्प लिया था। इजरायल के अनुसार, हमास चीफ ने ही गाजा में युद्ध की शुरुआत की है।

साभार : इंडिया टीवी

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।