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भाजयुमो ने बीएचयू गेट पर लगाया ‘हिंदू जाति में बंटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे’ पोस्टर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से दिए गए बयान ‘बटोगे तो कटोगे’ को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। सीएम योगी के इस नारे का असर सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल रहा है। वहीं यूपी में होने वाले उपचुनाव से भी इस नारे को जोड़ कर देखा जा रहा है। इस बीच वाराणसी के बीएचयू गेट के पास भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एक पोस्टर लगाया है, जो चर्चा में बना हुआ है। यहां भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जो पोस्टर लगाया है, उस पर ‘हिंदू जाति में बटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे’ लिखा है।

बीएचयू के सिंह द्वार के पास लगे पोस्टर

दरअसल, यूपी की नौ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इसे लेकर यूपी में भी सियासी गर्मी बढ़ गई है। वहीं पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी इस सियासी गर्मी से अछूता नहीं है। वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सिंह द्वार के ठीक बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा की तरफ से एक पोस्टर लगाया गया है। इस पोस्टर पर लिखा हुआ है कि ‘हिंदू जाति में बटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे… फैसला आपका’। वहीं बैनर लगवाने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता ने खुद की तस्वीर और नाम भी बैनर पर छपवाया है। उसने खुद का नाम विवेक सिंह भारतीय जनता युवा मोर्चा वाराणसी महानगर मंत्री बताया है।

हिंदुओं के एकजुट होने की अपील

वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा के वाराणसी महामंत्री विवेक सिंह ने बताया है कि अगर हिंदू अभी भी जातियों में बट जाएंगे तो देश का हाल बांग्लादेश जैसा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वह सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान ‘बटोगे तो कटोगे’ का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि यह पोस्टर विपक्ष को संदेश देने के लिए लगाया गया है। विवेक सिंह ने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू धर्म को जो लोग मानने वाले हैं मैं उन्हें संदेश देना चाहता हूं कि भारतवर्ष में हिंदू इकट्ठा हो जाइए और भाईचारे की मिसाल पेश कीजिए।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।