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बनारस से गुजर रही वंदे भारत ट्रेन पर हुई पत्थरबाजी, टूटे शीशे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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वाराणसी. लखनऊ से पटना जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पर बनारस और काशी रेलवे स्टेशन के बीच अज्ञात युवक ने पथराव कर दिया. यह घटना बुधवार की रात सवा आठ बजे की है. पथराव से वंदे भारत के कोच नंबर सी5 की खिड़के के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए. वहीं पथराव की घटना की जानकारी मिलने के बाद बनारस एवं काशी के आरपीएफ के जवानों ने घटनास्थल की नाकाबंदी करके आरोपित अज्ञात युवक की खोजबीन शुरू की. लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए आउट पोस्ट काशी पर मुकदमा रेलवे एक्ट की धाराओं में पंजीकृत किया गया है, जिसकी जांच प्रभारी निरीक्षक RPF व्यासनगर के द्वारा की जा रही है. लोकल इनपुट जुटाए जा रहे हैं. साथ ही वंदे भारत में लगे कैमरे को चेक करने का प्रयास किया जा रहा है. जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी अमल में लाई जाएगी. हालांकि किसी यात्री को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा है.

रांची से चलकर पटना जाने वाली वंदे भारत ट्रेन पर पथराव हुआ है. ट्रेन नंबर 22350 ट्रेन पर हजारीबाग के चरही एवं बेस रेलवे स्टेशन के बीच में पथराव हुआ है जिससे ट्रेन को नुकसान पहुंचा है और बोगी नंबर E-1 वन की सीट नंबर 5 और 6 के पास का ग्लास पूरी तरह टूट गया. हालांकि, इससे अंदर बैठे किसी यात्री को नुकसान नहीं पहुंचा है. लेकिन देश के सबसे हाई क्लास ट्रेनों में से एक वंदे भारत ट्रेन की सुरक्षा में यह चूक है. हालांकि अभी इस पर किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि अधिकारियों ने नहीं की है कि ये पत्थर किसने चलाये एवं ये घटना कैसे घटित हुई. बता दें कि इस पथराव में खिड़की के शीशे बुरी तरह से चकनाचूर हो गये. हालांकि, राहत की बात है कि ट्रेन में बैठे किसी यात्री को कोई नुकसान नहीं हुआ है. हाई क्लास ट्रेन में सुरक्षा में चूक होने पर कई सवाल भी है. वहीं, जानकारी के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के जरिए और सामाजिक तत्वों की पहचान की कोशिश हो रही है. वहीं, इस हमले को लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है और न ही किसी ओर से इस घटना की आधिकारिक पुष्टि ही की गई है.

साभार : न्यूज़18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।