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हाथरस भगदड़ के मुख्य आरोपी मधुकर सहित 3 आरोपियों की 14 दिन की रिमांड

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के हाथरस भगदड़ (Hathras Stampede) मामले में 121 लोगों की मौत के बाद अब आरोपियों पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है. इस मामले में गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने आरोपी देवप्रकाश मधुकर (Devprakash Madhukar ) और 2 अन्य आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वहीं पुलिस सोमवार को देवप्रकाश मधुकर की पुलिस रिमांड के लिए अर्जी लगाएगी. हाथरस भगदड़ मामले में पुलिस ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें आरोपी देवप्रकाश मधुकर भी शामिल है, जिस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था.

उत्तर प्रदेश पुलिस के शीर्ष सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस जरूरत पड़ने पर बाबा सूरजपाल को भी समन भेजेगी. पुलिस समन के जरिए बाबा सूरजपाल को जांच में शामिल होने के लिए बोल सकती है.

मुख्‍य आयोजक था देवप्रकाश मधुकर

देवप्रकाश मधुकर को पुलिस ने दिल्‍ली के नजफगढ़ से गिरफ्तार किया गया है. मधुकर पर एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था. सूत्रों के मुताबिक, मधुकर सत्‍संग का मुख्‍य आयोजक था. साथ ही वह आयोजन के लिए फंड भी जुटाता था. साथ ही उसके ऊपर क्राउड मैनेजमेंट का भी जिम्‍मा था. वहीं पुलिस ने रामप्रकाश और संजू यादव को भी गिरफ्तार किया है.

पुलिस को अंदर नहीं घुसने नहीं देते थे आरोपी

पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी पुलिस को अंदर जाने से रोकते थे और किसी को वीडियो नहीं बनाने देते थे. साथ ही आरोप है कि इन लोगों के द्वारा ही जानबूझकर बाबा की गाड़ी भीड़ से निकाली गई. पुलिस इसमें साजिश की भी जांच कर रही है.

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राजनीतिक दल के संपर्क में था मधुकर : पुलिस सूत्र

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मधुकर संगठन के लिए पैसे एकत्रित करता था और एक राजनीतिक दल के भी संपर्क में था. उन्‍होंने बताया कि राजनीतिक दल के खिलाफ जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी. साथ ही ट्रस्ट की फंडिंग और बैंक खातों की भी जांच होगी. इस मामले में पुलिस का कहना है कि अन्‍य एजेंसियों का भी सहयोग लेंगे.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।