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बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने इस्‍कॉन सेंटर को किया आग के हवाले

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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ढाका. बांग्लादेश में हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. बांग्लादेश में फैली अशांति के बीच इस्कॉन सेंटर में आग लगा दी गई है. जानकारी के मुताबिक इस्कॉन सेंटर में लक्ष्मी नारायण के विग्रह भी जल गए. मंदिर में रखा हुआ बाकी सामान भी जल गया. साथ ही मंदिर पर हमला भी किया गया. आग में नमहट्टा का इस्कॉन सेंटर जलकर खाक हो गया. बांग्‍लादेश (Bangladesh) में हिंदुओं के खिलाफ लगातार हमले हो (Attacks against Hindus) रहे हैं और कई हिंदू मंदिरों को कट्टरपंथियों निशाना बना जा रहा है.

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा चिंता का सबब

मोहम्‍मद यूनुस के नेतृत्‍व वाली बांग्‍लादेश की अंतरिम सरकार के शासन के दौरान बांग्‍लादेश में अल्‍पसंख्‍यकों खासतौर पर हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा (Bangladesh Violence) की घटनाओं का भारत में विरोध बढ़ता जा रहा है. बांग्लादेश में इस्कॉन से जुड़े रहे चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद माहौल और बिगड़ा है. कट्टरपंथियों के हिंदू समुदाय पर हमले बढ़े हैं. जिस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (United Nations Peace Mission) तैनात करने की गुजारिश की थी.

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर भी बवाल

सम्मिलिता सनातनी जागरण जोत से जुड़े चिन्मय कृष्ण दास की ‘देशद्रोह’ के आरोप में 25 नवंबर को ढाका में गिरफ्तारी हुई थी. यह गिरफ्तारी 31 अक्टूबर को एक स्थानीय राजनेता की शिकायत के बाद हुई, जिसमें चिन्मय दास और अन्य पर हिंदू समुदाय की एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया था. जिसके बाद से बांग्लादेश में हालात फिर से असमान्य दिखाई दिए.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।