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सीरिया का तीसरा सबसे बड़ा शहर होम्स भी सेना के हाथ से निकलने की ओर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बेरूत. सीरीया में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सीरियाई सरकारी बलों ने दारा शहर पर नियंत्रण खो दिया है। यह राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस बीच सीरिया के मध्य में स्थित तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स से हजारों लोग पलायन कर गए हैं। विद्रोहियों ने देश के सबसे बड़े शहर अलेप्पो के अधिकतर भूभाग पर कब्जा करने के बाद होम्स को भी काफी हद तक अपने कब्जे में ले लिया है। सेना ने कहा कि वह शहर के अंदर लड़ाई से बचने और नागरिकों की जान बचाने के लिए वहां से हट गई है।

होम्स शहर से भाग रहे हैं लोग

जिहादी हयात तहरीर अल-शाम समूह (एचटीएस) के नेतृत्व में विद्रोहियों ने होम्स और राजधानी दमिश्क तक मार्च करने की बात कही है। ऑनलाइन प्रसारित हो रहे वीडियो में एक राजमार्ग पर बड़ी संख्या में कार दिखाई दी। इन कारों में होम्स शहर से भाग रहे लोग सवार थे। इस बीच ईरान, इराक और सीरिया के विदेश मंत्री तेजी से बदलते हालात पर विचार-विमर्श करने के लिए बगदाद में एकत्र हुए है। इराक के विदेश मंत्री फवाद हुसैन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार सीरिया की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। सीरियाई विदेश मंत्री बासम सब्बाग ने कहा कि वर्तमान घटनाक्रम क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

डरे हुए हैं लोग

ब्रिटेन की ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ के अनुसार, विद्रोही लड़ाकों ने शुक्रवार को रस्तान और तलबीसेह कस्बों पर कब्जा कर लिया, जो होम्स से पांच किलोमीटर दूर स्थित हैं। विद्रोही बिना किसी प्रतिरोध का सामना किए रस्तान और तलबीसेह में घुसने में कामयाब रहे हैं।  दमिश्क के निवासियों ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि स्थिति और अधिक बिगड़ने के डर से लोग खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए बाजारों की ओर भाग रहे हैं।

तुर्किये ने क्या कहा?

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद का विरोध करने वाली ताकतें सीरिया में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने हाल के घटनाक्रम के लिए सीरिया के अपने समकक्ष बशर असद को दोषी ठहराया है। एर्दोआन ने कहा, ‘‘हमने असद को फोन किया था। हमने कहा आओ एक साथ मिलकर सीरिया का भविष्य तय करें। दुर्भाग्य से, हमें असद से सकारात्मक जवाब नहीं मिला।’’

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।