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पेटा ने बिग बॉस 18 के निर्माताओं को शो से गधे को बाहर करने के लिए लिखा पत्र

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. ‘बिग बॉस 18’ कई कारणों से सुर्खियों में है। शो के प्रतियोगी, थीम, एंथम, सलमान खान की बतौर होस्ट वापसी और घर में आया जानवर गधा। इन सबने दर्शकों का खासा ध्यान आकर्षित किया है। जानकारी हो कि प्रतियोगी एडवोकेट गुणरत्न सदावर्ते के गधे को भी शो का हिस्सा बनाया गया है। हालांकि, निर्माताओं के जरिए इस कदम को उठाए जाने पर ‘पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स’ (पेटा) इंडिया नाराज है। पेटा ने सलमान खान और बिग बॉस निर्माताओं से अनुरोध किया है कि वे मनोरंजन के उद्देश्य से किसी जानवर को शामिल न करें।

पेटा इंडिया ने निर्माताओं को भेजा पत्र

गधराज नाम का एक गधा भी ‘बिग बॉस 18’ का हिस्सा है। उसे गार्डन एरिया में जगह दी गई है और घर के सदस्यों को उसकी देखभाल करने का निर्देश दिया गया है। पेटा इंडिया टीम द्वारा बुधवार को भेजे गए पत्र के अनुसार, उनके पास गधे के घर में रहने से परेशान जनता की शिकायतों की बाढ़ आ गई है। उन्होंने मेजबान सलमान खान से अनुरोध किया है कि वे निर्माताओं से आग्रह करें कि वे जानवरों को मनोरंजन के साधन के रूप में इस्तेमाल करने से बचें।

गधे को बाहर निकालने की मांग

पत्र में लिखा है, ‘हमारे पास कई लोगों की शिकायतें आई हैं, जिसमें उन्होंने गधराज को शो से बाहर करने का अनुरोध किया है। लोगों का कहना है कि शो को मनोरंजक बनाने के लिए किसी भी जानवर का इस्तेमाल ठीक नहीं है। इससे कई परेशानी होंगी, हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप एडवोकेट गुणरत्न सदावर्ते को बोलें कि वह गधराज (गधा) को पेटा इंडिया को सौंप दें।’

गुणरत्न सदावर्ते के रिसर्च पर पेटा इंडिया की दो टूक

पेटा इंडिया की ओर से जारी किए गए पत्र में यह भी लिखा है, ‘गधा एक सोशल एनिमल है और इसे अपने झुंड में रहने की आजादी मिलनी चाहिए। गुणरत्न सदावर्ते ने दूध पर रिसर्च करने लिए इस गधे को रखा है।’ पेटा इंडिया टीम ने स्पष्ट किया है कि गधे सिर्फ अपने बच्चों के लिए दूध देते हैं। पेटा के इस पत्र में सलमान खान, वायाकॉम 18 और बानिजय एशिया (प्रोडक्शन हाउस) का भी जिक्र है।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।