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डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को गवर्नर बता उड़ाया मजाक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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वॉशिंगटन. कनाडा पर हमलावर रहन वाले अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का मजाक उड़ाया है। डोनाल्ड ट्रंप ने जस्टिन ट्रूडो के साथ डिनर का जिक्र करते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री को गवर्नर बता दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, ‘ग्रेट स्टेट कनाडा के गवर्नर जस्टिन ट्रूडो के साथ डिनर करके बहुत अच्छा लगा।’ ट्रंप का ये बयान तब आया है, जब उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाने की सलाह दी है। ट्रंप ने पोस्ट में आगे लिखा, ‘मैं गवर्नर से दोबारा मिलने के लिए उत्सुक हूं, ताकि हम टैरिफ और व्यापार पर अपनी गहरी बातचीत को जारी रख सकें, जिसके नतीजे हम सभी के लिए शानदार होंगे।’ इसके पहले पिछले सप्ताह जस्टिन ट्रूडो के साथ डिनर के दौरान ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाने की सलाह दी थी।

कनाडा को अमेरिकी राज्य बनने की सलाह

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रूडो ने मुलाकात के दौरान कनाडा पर टैरिफ की ट्रंप की घोषणा को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी की थी। ट्रंप के मार-ए-लागो क्लब में दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात हुई थी। इसमें कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री डोमिनक लेब्लांक ने भी शामिल हुए थे। बाद में उन्होंने कहा था कि ट्रंप की यह टिप्पणी मजाक में थी।

कनाडा के साथ क्यों बढ़ रहा तनाव

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में धमकी दी थी कि जब तक वे प्रवासियों और ड्रग्स की बाढ़ को रोक नहीं देते, तब तक वे कनाडा और मैक्सिको से अमेरिका में प्रवेश करने वाले सभी उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा देंगे। इसके बाद ट्रूडो ने टैरिफ से बचने के लिए ट्रंप के साथ बैठक का अनुरोध किया कि अमेरिका की उत्तरी सीमा मेक्सिको के साथ लगती दक्षिणी सीमा जैसी नहीं है। इसके बाद कनाडाई पीएम फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो क्लब में ट्रंप से मिलने पहुंचे थे। यहां मुलाकात के दौरान ट्रूडो ने टैरिफ पर ट्रंप को समझाने की कोशिश की, जिसके बाद ट्रंप ने कहा अगर आप टैरिफ नहीं दे सकते तो अमेरिका का 51वां राज्य बन जाइए।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।