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छोटे ओवैसी को घर में रोका अच्छा है, हर गली में हैं रामभक्त : नवनीत राणा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. भाजपा नेता नवनीत राणा ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोलते हुए कहा कि “राम भक्त” (भगवान राम के भक्त) हर गली में घूम रहे हैं. अपने भाई को ‘तोपची’ बताने वाली ओवैसी के बयान पर रिएक्शन देते हुए राणा ने कहा कि ऐसी ‘तोपें’ उनके घर के बाहर सजावट के लिए रखी गई थीं. राणा ने कहा कि वह सैनिक की बेटी हैं. उन्होंने कहा कि “हम सजावट के लिए तोपें बाहर रखते हैं… ओवैसी कहते हैं कि उन्होंने अपने भाई को नियंत्रण में रखा है. यह अच्छा है, अन्यथा राम भक्त और मोदी जी के शेर देश की हर गली में घूम रहे हैं.” मैं जल्द ही हैदराबाद आ रही हूं.

तोप की तरह है अकबरुद्दीन

राणा का रिएक्शन मोगलपुरा में एक रैली के दौरान असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका छोटा भाई अकबरुद्दीन एक तोप की तरह था, जिसे उन्होंने काफी प्रयासों के बाद नियंत्रित किया है. असदुद्दीन ने कहा कि “मैंने छोटे भाई (अकबरुद्दीन) को रोक दिया है. आप नहीं जानते कि छोटे कौन है. वह एक कैनन है. सालार का बेटा. आप क्या चाहते हैं? क्या मुझे छूट देना चाहिए?”

लापता होंगे ओवैसी बंधु

राणा ने यह बयानबाजी तब की जब वह भाजपा की हैदराबाद लोकसभा उम्मीदवार माधवी लता के लिए प्रचार पर आईं. उन्होंने कहा कि “15 सेकंड” के लिए अगर पुलिस की ड्यूटी हटा दी जाए तो पता नहीं चलेगा कि ओवैसी बंधु कहां से आए थे और कहां चले गए. भाजपा नेता AIMIM विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के 2013 के एक विवादास्पद भाषण का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पुलिस को हटा दिया जाए तो देश में “हिंदू-मुस्लिम अनुपात” को संतुलित करने में उन्हें केवल “15 मिनट” लगेंगे.

15 सेकंड के लिए पुलिस हटाओ

नवनीत राणा ने कहा कि “छोटा भाई कहता है कि 15 मिनट के लिए पुलिस हटाओ, फिर हम उन्हें दिखाएंगे कि हम क्या कर सकते हैं. मैं उनसे कहना चाहती हूं: प्यारे छोटे भाई, 15 सेकंड पुलिस हटा लो, दोनों को पता नहीं लगेगा कि वो कहां से आए और किधर को गए.

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साभार : जी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।