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मालदीव ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलने वाले दो मंत्रियों का लिया इस्तीफा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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माले. मालदीव अब अपनी औकात में आने लगा है। चीन समर्थन मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने धीरे-धीरे अपना सुर बदलना शुरू कर दिया है। अपनी आगामी भारत यात्रा से पहले मुइज्जू ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले तीन में से दो मंत्रियों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

दो मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

मालदीव के तीन उप-मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर भारत और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में विवादास्पद टिप्पणी की थी। इसके बाद भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में तनाव और बढ़ गया था। हालांकि मालदीव के विदेश मंत्रालय ने मंत्रियों की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया था और कहा था कि वे माले सरकार के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इसके बाद तीन उप मंत्रियों को निलंबित कर दिया गया था। इनमें से उप मंत्री मरियम शिउना और मालशा शरीफ ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया।

जल्द भारत आएंगे मुइज्जू

मोहम्मद मुइज्जू के कार्यालय की मुख्य प्रवक्ता हीना वलीद ने बताया कि राष्ट्रपति जल्द ही भारत की आधिकारिक यात्रा करेंगे। अभी तारीख का चयन नहीं हुआ है। मगर दोनों देश तारीख पर चर्चा कर रहे हैं। चीन समर्थक मोहम्मद मुइज्जू ने 9 जून को प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया था।

मुइज्जू ने तोड़ी परंपरा

मालदीव में राष्ट्रपति का चुनाव जीतने वाला हर नेता अपनी पहली आधिकारिक यात्रा भारत की करता था। मगर मोहम्मद मुइज्जू ने इस परंपरा को तोड़ दिया। उन्होंने भारत की जगह सबसे पहली यात्रा तुर्किये की और इसके बाद चीन की राजकीय यात्रा की।

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मुइज्जू के साथ भारत के तनाव भरे रिश्ते

मुइज्जू के सत्ता में काबिज होने के बाद से ही भारत के साथ मालदीव के रिश्ते तनाव भरे हैं। उन्होंने शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर मालदीव को भारत द्वारा उपहार में मिले तीन विमानन प्लेटफॉर्म पर तैनात भारतीय सैनिकों को हटाने का एलान किया था। भारतीय सैनिकों की जगह मालदीव ने अपने नागरिकों की तैनाती की।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।