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कन्या भोज में मुस्लिम बच्ची को बैठाने पर चलाए पत्थर, टीका लगाने पर भी जताई आपत्ति

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. मेरठ में अष्टमी व नवमी पर कन्या भोज के दौरान एक मुस्लिम बच्ची को भी जिमाने के लिए बैठा लिया गया। इसका कुछ हिंदू महिलाओं ने विरोध किया। वाद-विवाद में दोनों पक्ष की महिलाओं में मारपीट हो गई। दोनों पक्ष के लोग भी आमने-सामने आ गए। इसके बाद दोनों पक्षों में पत्थर चले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को खदेड़ा। दो महिलाओं को पुलिस हिरासत में लेकर थाने ले आई। बाद में उन्हें झगड़ा नहीं करने व जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी पर छोड़ा गया।

जागृति विहार सेक्टर एक में एक खाली प्लाट है। इसमें दोनों ही समुदाय के लोग झुग्गी बनाकर रहते हैं। अष्टमी व नवमी पर हिंदू परिवारों में कन्या भोज किया जा रहा था। इसमें कुछ मुस्लिम बच्ची व बच्चे भी पहुंच गए। इस पर पास में बैठे हिंदू पक्ष के बच्चों के स्वजन ने एतराज जताया। मुस्लिम पक्ष की महिलाओं ने भी विरोध कर रही महिलाओं से नाराजगी जताई। हिंदू पक्ष ने इसे गलत बताते हुए बच्चों को जिमाना जारी रखा।

एक पक्ष ये भी…

दूसरी ओर, कुछ लोगों का कहना है कि कन्या भोज के दौरान बच्चों को टीका लगाने पर मुस्लिम बच्चों के स्वजन ने एतराज जताया। इस पर विवाद हुआ। दोनों पक्ष की महिलाओं में कहासुनी के बाद मारपीट हुई। फिर दोनों पक्ष के पुरुष व अन्य लोग शामिल हो गए। उनमें पथराव होने लगा। पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हुआ। जानकारी पर हिंदू जागरण मंच के पूर्व महानगर अध्यक्ष सचिन सिरोही ने इंस्पेक्टर मेडिकल शीलेश कुमार से बातचीत कर पथराव करने वाले दूसरे समुदाय के लोगों पर कार्रवाई की मांग की। हिंदू पक्ष का उत्पीड़न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

इंस्पेक्टर ने क्या बताया?

इंस्पेक्टर ने बताया कि मामला टीका लगाने का नहीं है। कन्या भोज में पुराने बच्चों को बुलाया गया था। नए पहुंचे बच्चों को शामिल नहीं किया तो उन्होंने घर जाकर शिकायत की। इस पर विवाद हुआ। कुछ लोग मुस्लिम बच्चों को कन्या भोज में बैठाने का भी विरोध कर रहे थे।

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साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।