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कनाडा से नाराज भारत ने वापस बुलाए अपने राजनयिक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. खाल‍िस्‍तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्‍जर को लेकर कनाडा की बेतुकी बयानबाजी पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है. भारत सरकार ने कनाडा से अपने राजनय‍िकों को वापस बुला ल‍िया है, ज‍िन पर ट्रूडो सरकार ने गंभीर और आरोप लगाए थे. इससे पहले कनाडा ने भारत सरकार को पत्र लिखकर आपत्‍त‍िजनक टिप्‍पण‍ियां की थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए भारत ने कनाडा के हाई कमिश्नर को तलब क‍िया था.

कनाडा के उच्चायुक्त को समन किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने बयान जारी क‍िया. कहा, कनाडा के कार्यवाहक उच्चायुक्त को आज शाम सचिव तलब किया गया था. उन्हें बताया गया कि कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों और अधिकारियों को आधारहीन बातों पर निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है. विदेश मंत्रालय ने कहा, कनाडा के उच्‍चायुक्‍त को बताया गया क‍ि उग्रवाद और हिंसा के माहौल में ट्रूडो सरकार के कार्यों ने उनकी सुरक्षा को खतरे में डाल दिया. हमें उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस हुई. हमें लगता है क‍ि कनाडा की मौजूदा सरकार उन्‍हें सुरक्षा नहीं दे सकती. इसलिए, भारत सरकार ने उच्चायुक्त और उन सभी राजनयिकों और अधिकारियों को वापस बुलाने का फैसला किया है, ज‍िस पर झूठे आरोप लगाए गए हैं.

विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा क‍ि हमने कनाडा के उच्‍चायुक्‍त को यह भी बताया कि भारत के खिलाफ उग्रवाद, हिंसा और अलगाववाद के लिए ट्रूडो सरकार के समर्थन के जवाब में भारत आगे कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है. कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा हैं जिन्हें वापस बुलाने का फैसला भारत ने किया है. इनके अलावा दूसरे राजनयिकों को भी वापस बुलाने का फैसला ल‍िया गया है, जिन्हें निशाना बनाया गया है. कनाडा ने इन राजनय‍िकों पर निज्‍जर को लेकर चल रही जांच पर निगरानी रखने का आरोप लगाया था.

साभार : न्यूज़18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।