लोड हो रहा है...

हरियाणा को विधानसभा के लिए चंडीगढ़ में जमीन देने पर विवाद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चंडीगढ़. हरियाणा की नई विधानसभा के लिए चंडीगढ़ में जमीन देने को लेकर घमासान मच गया है। हरियाणा में भाजपा की सरकार है। इसके बावजूद पंजाब के भाजपा प्रधान सुनील जाखड़ ने इसका विरोध जताया है। जाखड़ ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देकर जमीन की अलॉटमेंट रुकवाने की मांग की है। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और अकाली दल ने भी इसका विरोध किया है।

वहीं हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने पंजाब CM भगवंत मान को लेकर कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का तब है जब हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा को दे दोगे। वहीं हरियाणा से भाजपा की राज्यसभा सांसद किरण चौधरी ने कहा कि चंडीगढ़ किसी एक की बपौती नहीं है। बता दें कि हरियाणा विधानसभा की नई बिल्डिंग बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 11 नवंबर को गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है। हरियाणा को चंडीगढ़ के IT पार्क के पास जमीन मिली है, यह एरिया पंचकूला से सटा हुआ है।

पंजाब BJP प्रधान बोले- चंडीगढ़ जमीन का टुकड़ा नहीं, लोगों की भावना

पंजाब भाजपा के प्रधान सुनील जाखड़ ने इस फैसले पर सख्त ऐतराज जताते हुए कहा- चंडीगढ़ हमारे लिए जमीन का टुकड़ा नहीं, इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री ने पंजाब को अतीत में मिले घावों पर मरहम लगाने के कई प्रयास किए हैं, लेकिन हरियाणा को चंडीगढ़ में विधानसभा भवन के लिए अलग जगह अलॉट करने से लोगों को ठेस पहुंचेगी। उन्हें इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

मंत्री विज बोले- पंजाब ने समझौता लागू नहीं किया मंत्री अनिल विज बोले- ‘‘पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान साहब कहते हैं कि चंडीगढ़ हमारा है, लेकिन चंडीगढ़ तुम्हारा तब है, जब तुम हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा को स्थानांतरित कर दोगे, जब हमें सतलुज यमुना लिंक (SYL) का पानी दे दोगे, जब तक ये नहीं देते हो तब तक इसके ऊपर हमारा अधिकार है। हम चंडीगढ़ में तभी तक बैठे हुए हैं, क्योंकि जो दोनों राज्यों के बीच समझौता हुआ है, पंजाब उसे लागू ही नहीं कर रहा है, तो चंडीगढ़ किस प्रकार से तुम्हारा हुआ’।

- Advertisement -

अनिल विज ने आगे कहा-‘‘जिस समय पंजाब और हरियाणा अलग हुए, तो उस समय हरियाणा को इसमें (वर्तमान विधानसभा परिसर) एडजस्ट किया गया। अभी हरियाणा में 90 सदस्य हैं, अगला परिसीमन बनाया जाता है तो ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि 120 सदस्य हो जाएंगें। उन्होंने कहा कि वर्तमान विधानसभा में 120 सदस्यों के बैठने की जगह नहीं है, और जगह चाहिए और इस संबंध में पहले से ही हमने (हरियाणा) तैयारी कर दी थी’’।

साभार : दैनिक भास्कर

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।