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ममता बनर्जी कर रही हैं अपने नेताओं को बचाने की कोशिश : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के संदेशखाली में महिलाओं से यौन उत्पीड़न मामले में सीएम ममता बनर्जी ने गुरुवार (15 फरवरी) को विधानसभा में अपनी बात रखी। ममता ने कहा कि संदेशखाली में तनाव पैदा करने की भयानक साजिश चल रही है। ममता ने कहा- संदेशखाली RSS का गढ़ है। वहां 7-8 साल पहले भी दंगे हुए थे। यह संवेदनशील स्थलों में से एक है। मैंने कभी किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया है और न ही होने दूंगी। गलत काम में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

ममता ने कहा- अब तक 17 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। राज्य महिला आयोग और पुलिस टीम को संदेशखाली भेजा गया है। महिला पुलिस की एक टीम घर-घर जाकर महिलाओं की शिकायतें सुन रही है। स्थिति को काबू किया जा रहा है। दूसरी तरफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष अरुण हलदर और मेंबर अंजू बाला ने पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की। अरुण हलदर ने बताया कि वे शुक्रवार (16 फरवरी) की सुबह 11 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संदेशखाली मामले पर रिपोर्ट सौंपेंगे।

वहीं, अंजू बाला ने कहा- ममता बनर्जी खुद एक महिला CM हैं, लेकिन वे कुछ भी बताना नहीं चाहती हैं। वे अपने नेताओं को बचाने की कोशिश कर रही हैं। उनका नाम ममता है, लेकिन दिल में ममता नाम की चीज नहीं है।

संदेशखाली में महिलाओं से यौन उत्पीड़न का मामला समझिए

संदेशखाली में महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस के (TMC) नेता शेख शाहजहां और उसके सहयोगियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। लोगों का दावा है कि शाहजहां ने जबरन लोगों की जमीन पर कब्जा भी कर रखा है। इसके चलते वहां पिछले एक हफ्ते से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। बुधवार (14 फरवरी) को प्रदर्शन के सातवें दिन बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतर आईं और शाहजहां और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी की मांग की। एक महीने पहले राशन घोटाले में ED ने नॉर्थ 24 परगना जिले में शाहजहां के ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान ED अधिकारियों पर हमला हुआ था। तब से शाहजहां ​​​​​फरार है।

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राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में दावा किया कि महिलाओं का उत्पीड़न TMC के नेता और पुलिस अधिकारी करते थे। उनके पास कई महिलाओं की शिकायत पहुंची हैं। आयोग ने कहा- संदेशखाली की महिलाएं जैसी ही अपने खिलाफ अत्याचार का आरोप लगाती है, वैसे ही TMC के नेता या पुलिसवाले उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हैं। वे या तो महिलाओं से उनकी संपत्ति जब्त करने लगते है या फिर उनके परिवार के पुरुष सदस्यों को मनमाने तरीके से गिरफ्तार करते हैं।

बंगाल भाजपा के अध्यक्ष और बालूरघाट से सांसद सुकांत मजूमदार मंगलवार (13 फरवरी) को भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ संदेशखाली में पीड़ित महिलाओं से मिलने जा रहे थे। बशीरहाट पुलिस ने उन्हें ताकी के एक गेस्ट हाउस में ही रोक दिया। यहां से संदेशखाली 30 किलोमीटर दूर है। सुकांत बुधवार सुबह एक बार फिर संदेशखाली जाने के लिए अड़ गए। पुलिस ने उन्हें दोबारा रोका। इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं से पुलिस की झड़प हो गई। पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। इस दौरान सुकांत घायल हो गए। वे कोलकाता के निजी अस्पताल के ICU में भर्ती हैं।घटना के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने संदेशखाली समेत सात ग्राम पंचायतों के 500 मीटर के दायरे में 19 फरवरी तक धारा 144 लागू कर दी है।

स्मृति ईरानी का आरोप- अपने वर्कर को बचा रहीं ममता बनर्जी

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी तृणमूल के मजबूत नेता शेख शाहजहां को बचा रही हैं। ईरानी ने कहा था- ममता बनर्जी ने SC, ST, मछुआरों के परिवार और किसानों के सम्मान का सौदा कर लिया। उनकी महिलाओं का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है।

HC ने ममता सरकार से 20 फरवरी तक जवाब मांगा

महिलाओं से रेप के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को संज्ञान लिया था। कोर्ट ने महिलाओं से रेप और उनकी जमीनें हड़पने के मामले में ममता सरकार से 20 फरवरी तक जवाब मांगा है। वुमंस कमीशन ने भी महिलाओं से रेप के आरोपों पर चिंता जाहिर की है। पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले के संदेशखाली में महिलाओं ने TMC नेता शेख शाहजहां और उनके समर्थकों पर यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा- ममता बनर्जी TMC के गुंडों को संरक्षण दे रही हैं। TMC के लोग कम उम्र की हिंदू लड़कियों को रात में उठा रहे हैं।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।