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भारत कुछ करेगा, तो पाकिस्तान भी देगा जवाब : मुमताज जेहरा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान पर टिप्पणी के बाद पाकिस्तान ने गीदड़भभकी दी है. उसने कहा है कि भारत के नेता अपने चुनावी फायदे के लिए पाकिस्तान को घसीटना बंद करें. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा, अगर भारत पाक के खिलाफ कोई कदम उठाता है तो वो उसका जवाब देने से नहीं हिचकिचाएगा. दरअसल, पीएम मोदी ने एक रैली में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए पाकिस्तान को ‘चूड़ियां पहनाने’ वाला बयान दिया था, जिस पर पाकिस्तान बौखला गया. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और अन्य मंत्री पाकिस्तान पर टिप्पणी न करें.

‘कोई दुस्साहस करेगा तो हम नहीं हिचकिचाएंगे’

प्रवक्ता ने कहा कि ये बयान पाकिस्तान के प्रति नफरत को दिखाते हैं. इनसे स्पष्ट होता है कि जानबूझकर बयानों से नेता चुनावी लाभ लेना चाहते हैं. पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना जानता है. पाकिस्तान ने पहले भी अपनी रक्षा करने के संकल्प को दिखाया है और अगर भारतीय पक्ष दुस्साहस करना चाहता है तो हम आगे भी ऐसा करने से नहीं हिचकिचाएंगे.

यहां से शुरू हुआ ये विवाद

दरअसल, कुछ समय पहले देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि पीओके में बलपूर्वक कब्जा करने की जरूरत नहीं है, वहां के लोग खुद भारत में शामिल हो जाएंगे. इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक ने कहा था कि अगर रक्षा मंत्री ऐसा कह रहे हैं तो आगे बढ़ें. हम रोकने वाले कौन होते हैं? लेकिन याद रखें, पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहनी हैं. उसके पास परमाणु बम है। फारूक अब्दुल्ला के इस बयान पर बीजेपी ने हंगामा किया और कहा कि विपक्षी इंडिया के नेताओं पर पाकिस्तान की छाप है.

पीएम मोदी ने कहा था…

बिहार के मुजफ्फरपुर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि ये लोग इतने डरे हुए हैं कि इन्हें रात के सपने में भी परमाणु बम दिखाई देता है. INDIA गठबंधन के नेताओं के बयान देख लीजिए. कहते हैं कि पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहनी है.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।