लोड हो रहा है...

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने कश्मीर पर चर्चा के लिए भारत विरोधियों को दिया आमंत्रण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

वाशिंगटन. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कश्मीर पर होने वाली एक डिबेट को लेकर ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों और ब्रिटिश हिंदुओं ने चिंता जताई है. भारतीयों और ब्रिटिश हिंदुओं के लिए काम करने वाले सोशल मूवमेंट ने ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी को एक खत लिखा है, जिसमें डिबेट कराने को लेकर चिंताई जताई गई है. दरअसल, इस डिबेट का शीर्षक यानी टाइटल है- ‘यह हाउस आजाद कश्मीर का समर्थन करता है.’ अब इस पर सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि जो दो स्पीकर्स इस मुद्दे पर डिबेट के समर्थन में हैं, वे आतंकवाद और दहशत फैलाने वाले समूहों से जुड़े हैं. इस वजह से उनकी आलोचना हो चुकी है. बहस की अखंडता के लिए संभावित खतरों का हवाला देते हुए सोशल मूवमेंट ने कहा कि जिन दो स्पीकर्स मुजम्मिल अय्यूब ठाकुर और जफर खान को न्योता दिया गया है, उनके आतंकियों से कनेक्शन हैं.

स्पीकर्स के आतंकियों से लिंक होने के आरोप

ब्रिटेन में ब्रिटिश हिंदुओं और भारतीयों पर प्रभाव डालने वाले मुद्दों पर काम करने वाले सोशल मूवमेंट ने खत में कहा कि मुजम्मिल अय्यूब ठाकुर पर नफरती भाषण देने का आरोप है. साथ ही उनके ऐसी संस्थाओं के साथ रिश्ते हैं, जिनके आतंकियों से तार जुड़े होने को लेकर जांच चल रही है. INSIGHT UK ने ठाकुर और उनकी ऑर्गनाइजेशन वर्ल्ड कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट के बैकग्राउंड पर भी जोर दिया. वह इसके और मर्सी यूनिवर्सल के प्रेसिडेंट हैं, जो उनके पिता ने शुरू की थी. इन दोनों की ही जांच ब्रिटेन की स्कॉटलैंड यार्ड, चैरिटी कमीशन और एफबीआई ने की थी. इन एजेंसियों को इसके आतंकी गतिविधि में शामिल होने का शक था.

लोगों में डर फैलाता है अय्यूब

खत में कहा गया, ‘मुजम्मिल अय्यूब अकसर नफरती भाषण देता है. उसके खिलाफ केस भी दर्ज है. वह सोशल मीडिया के जरिए लोगों में डर फैलाता है और उनको ऐसे अपराध करने के लिए उकसाता है, जो कानून एवं व्यवस्था के लिए मुसीबत बन जाता है.’

JKLF से जुड़ा है जफर खान

दूसरी ओर खत में कहा गया कि जफर खान जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का चेयरमैन है और ऐसे ग्रुप से जुड़ा हुआ है, जो कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाती है. JKLF ही वो संस्था थी, जिसने 1984 में ब्रिटेन में भारतीय राजनयिक रवींद्र महात्रे की अगवा करने के बाद हत्या कर दी थी. खत के मुताबिक, ‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट एक आतंकी संगठन है, जिसकी शाखाएं ब्रिटेन के कई शहरों में है. 1984 में JKLF ने भारतीय राजनयिक रवींद्र महात्रे को बर्मिंघम में अगवा करने के बाद जान से मार दिया था.’ INSIGHT UK ने कहा कि ऑक्सफोर्ड यूनियन का इस टॉपिक पर डिबेट कराने का फैसला चिंताजनक है. यह क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सिद्धांतों के लिए खतरा है. यह चीज हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देगी. संस्था ने आगे कहा कि ऑक्सफोर्ड यूनियन जैसे शैक्षिक मंच को रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देना चाहिए ना कि ऐसे लोगों को जिनके आतंकी समूहों के साथ रिश्ते हों.

- Advertisement -

साभार : जी न्यूज़

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।