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नरेंद्र मोदी ने मोहम्मद यूनुस से बात कर बांग्लादेश में हिन्दुओं के हमले पर जताई चिंता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर मोहम्मद यूनुस से बात की है. मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से उनकी फोन पर बात हुई है. पीएम ने लिखा है कि बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर दोनों के बीच चर्चा हुई. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया. वहीं मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया है.

बांग्लादेश में कैसे हैं हालात?

बांग्लादेश में जून से जारी आरक्षण विरोधी आंदोलन के कारण शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. 5 अगस्त को उनके इस्तीफे के बाद सेना ने कमान संभाली और अंतरिम सरकार का गठन किया. प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया है. उधर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार जाते ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़ गए हैं. उपद्रवी हिंदुओं के घरों, व्यावसायिक इमारतों और धार्मिक स्थलों को निशाना बना रहे हैं. बीते करीब 10 दिनों में हिंदुओं पर हमले की 200 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पहले ही चिंता जता चुकी है, वहीं आज अंतरिम सरकार के मुखिया से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर ये मुद्दा उठाया है.

यूनुस सरकार का क्या है रुख?

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस कुछ दिन पहले ही ढाका के सबसे बड़े ढाकेश्वरी मंदिर पहुंचे थे. उन्होंने यहां हिंदू संगठनों के लोगों से बात कर सुरक्षा का भरोसा दिलाया. मोहम्मद यूनुस ने कहा था कि सबसे समान अधिकार हैं और किसी के भी साथ भेदभाव नहीं करना है. मोहम्मद यूनुस ने हिंदू समुदाय के लोगों से धैर्य रखने का आग्रह करते हुए कहा था कि हमारी सरकार काम के आधार पर आकलन किया जाना चाहिए.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।