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राम मंदिर वहीं पर बन रहा है, लेकिन उनके लिए अब अंगूर खट्टे हैं : योगी आदित्यनाथ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने राम मंदिर (Ram Mandir) के गर्भगृह को लेकर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि मंदिर उस जगह पर नहीं बन रहा है, जहां बाबरी मस्जिद थी. जिस पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उन पर पलटवार किया है. सीएम योगी ने एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि मंदिर वहीं पर बन रहा है. उनके लिए अब अंगूर खट्टे हैं.

संजय राउत के दावों पर जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा, “ये तो दर्शन करने आए थे, संजय राउत भी आए थे, उद्धव ठाकरे जी भी आए थे, उस समय आकर उन्होंने तमाम घोषणाएं भी की थीं. उस समय अपना अमूल्य सुझाव दिया होता…अब अंगूर खट्टे हैं अब तो कोई भी बोल सकता है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबको हैं. हर व्यक्ति को बोलने में कोई कठिनाई नहीं है. हमारी पूरी लड़ाई वहीं थी कि ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’.. और मंदिर वहीं पर बन रहा है.”

सीएम योगी ने साधा निशाना
सीएम योगी ने पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि, “कोर्ट के फैसले को पहले भी करवाया जा सकता था, इस बार-बार पेडिंग में क्यों डाला गया था, क्यों नहीं आप पैरवी कर रहे थे. राम मंदिर में देरी का कारण कोर्ट नहीं सरकारें और राजनीतिक दल थे. क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि इसका निर्णय हो.”

संजय राउत ने लगाया था ये आरोप
दरअसल शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था कि अयोध्या में राम मंदिर उस जगह पर नहीं बन रहा है जहां पर बाबरी मस्जिद थी, उन्होंने कहा कि मंदिर वहीं बनाएंगे बोलकर विवादित ढांचे को गिराया गया लेकिन अब मंदिर वहां से तीन किमी दूर जाकर क्यों बनाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि “बाबरी मस्जिद की बड़ी गुंबद के नीचे ही भगवान रामलला का जन्म हुआ था, इसलिए वहीं मंदिर बनाने के लिए विवादित ढांचे को गिराया गया था.”

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।