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पुत्र नकुलनाथ के भाजपा में शामिल हो सकते हैं कमलनाथ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भोपाल. मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है। पार्टी के दिग्गज नेता कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई है। इस बीच नकुलनाथ के एक्स हैंडल पार्टी का नाम और लोगो भी हट गया है। इस बीच एमपी के पूर्व मंत्री व कमलनाथ के करीबी सज्‍जन सिंह वर्मा ने भी अपना एक्‍स हैंडल प्रोफाइल चेंज कर दिया। इसमें भी कांग्रेस का चिन्‍ह नदारद है।

नकुलनाथ ने बायो से कांग्रेस हटाया

छिंदवाड़ा सांसद नकुलनाथ (Nakul Nath) ने अपने तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स के अपने बायो से कांग्रेस नाम हटा दिया है और उनके नाम के आगे सिर्फ छिंदवाड़ा सांसद लिखा है।

सोशल मीडिया पर कमलनाथ हो रहे ट्रेंड

कमलनाथ के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर भी कमलनाथ ट्रेंड कर रहा है, जिसमें कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, पिछले कई दिनों से जब कमल नाथ से उनके भाजपा में जाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया था।

सुमित्रा महाजन ने दिया था न्योता

पूर्व लोकसभा स्‍पीकर और पूर्व इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन ने पिछले दिनों कमलनाथ को जय सियाराम के नारे के साथ कमलनाथ को भाजपा में आने का निमंत्रण दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि विकास पसंद है तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

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भाजपा बोली- उनका स्वागत है

कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि अगर वो अपनी पार्टी से परेशान हैं तो उनका भाजपा में स्वागत है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने भी कमलनाथ और नकुलनाथ की फोटो के साथ जय श्री राम का नारा लिखा है।

दिग्विजय सिंह बोले- उनसे ये उम्मीद नहीं

कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि कल रात मेरी कमलनाथ से बातचीत हुई है। वह छिंदवाड़ा में हैं और वह ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना राजनीतिक करियर नेहरू-गांधी परिवार के साथ शुरू किया था। इसलिए उनके भाजपा में जाने की बात गलत है।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।