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बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चार्ज फ्रेम पर सुनवाई 26 अप्रैल तक टली

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. रेसलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चार्ज फ्रेम पर सुनवाई टल गई है। बृजभूषण शरण सिंह ने जो पहले याचिका दी है उस पर 26 अप्रैल को कोर्ट फैसला सुनाएगी। उसके बाद चार्ज फ्रेम पर सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि सीडीआर रिपोर्ट गैर जरूरी दस्तावेज़ है। शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि CDR रिपोर्ट ट्रायल का विषय है उसकी अभी ज़रूरत नहीं है। बृजभूषण के वकील ने कहा कि सीडीआर रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। सीडीआर रिपोर्ट के आधार पर 7 सितंबर की तारीख अस्तित्व में आ जायेगी। कोर्ट ने कहा पहले एप्लिकेशन पर फैसला होगा उसके बाद चार्जफ्रेम पर बात करेंगे।

बृजभूषण शरण सिंह ने दायर की है ये याचिका

महिला रेस्टलर छेड़छाड़ मामले में बृजभूषण शरण सिंह की तरफ से कोर्ट में एक एप्लीकेशन लगाई गई जिसमें कहा गया है कि एक शिकायतकर्ता के बयान में विरोधभास है। शिकयतकर्ता के मुताबिक वो जब wfi के दफ्तर गयी थी तो उसके साथ छेड़छाड़ कि गयी थी जबकि बृजभूषण ने कहा कि वो उस समय देश मे नहीं थे। जिसके एविडेंस में बृजभूषण ने पासपोर्ट की कॉपी भी लगाई है। लिहाजा उस मामले की एक बार फिर जांच के लिए याचिका लगाई गई है।

बृजभूषण के वकील ने दिया ये तर्क

बृजभूषण के वकील ने कहा कि हमने सीडीआर खोजने की कोशिश की थी लेकिन हमको वह दस्तावेज़ों में नहीं मिला। 7 सितंबर की तारीख रिकॉर्ड में कहीं पर भी नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि आपने यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया था। बृजभूषण के वकील ने कहा कि मामले में बहुत ज़्यादा दस्तावेज़ थे। हमने सीडीआर को खोजने की कोशिश किया था हमको नहीं मिला इस लिए हम चार्ज फ़्रेम होने के समय इस मुद्दे को उठा रहे हैं। बृजभूषण के वकील ने कहा कि अगर सीडीआर की रिपोर्ट है तो अभी दे दें। सही समय है इस मुद्दे को उठाने का। आगे इस मुद्दे को नही उठाया जा सकेगा, इसी लिए हम कह रहे हैं कि CDR रिपोर्ट पर लगा दें, नहीं तो इस बिंदु पर जांच का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने पूछा कि सीडीआर रिपोर्ट पर आ जाए, तो फिर आप बहस के लिए समय लेंगे।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।