लोड हो रहा है...

नारायण साईं को पिता आसाराम बापू से मिलने के लिए मिली जमानत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

अहमदाबाद. आसाराम बापू के बेटा नारायण साईं सूरत की लाजपोर जेल में दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद है। अब आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं को गुजरात हाईकोर्ट ने अपने पिता आसाराम से मिलने के लिए जमानत दे दी है। वह पिता आसाराम से जोधपुर जेल में 4 घंटे तक मिल सकेगा। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि जेल में पिता-पुत्र की मुलाकात के दौरान कोई भी मौजूद न रहे, साथ ही नारायण साईं अपनी मां और बहन से भी नहीं मिल पाएगा। बता दें कि जेल में बंद नारायण साईं ने जोधपुर जेल में बंद पिता आसाराम से मिलने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसको लेकर गुरुवार को सुनवाई हुई।

वकील ने कोर्ट में दी दलील

नारायण साईं के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि आसाराम का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। इसलिए वह जोधपुर जेल जाकर उनसे मिलना चाहता है, इसके बाद राज्य सरकार ने नारायण साईं की याचिका का पूरी तरह से विरोध किया। सरकार ने दलील दी कि आसाराम के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। ऐसे में अगर ज्यादा लोग इकठ्ठा होंगे तो लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पहले से ज्यादा बिगड़ सकती है। इसके साथ हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान नारायण साईं को हवाई मार्ग से जाने के लिए बोला।  इस पर राज्य सरकार ने कहा कि नारायण के साथ पुलिस अफसर और कर्मचारी भी जाएंगे और उनका खर्चा याचिकाकर्ता को उठाना होगा। साथ ही हाईकोर्ट ने नारायण साईं को 10 लाख रुपए डिपॉजिट करने को कहा। इसके साथ कोर्ट ने आगे कहा कि इस मुलाकात के लिए पहले ये रकम जमा की जाए।

नारायण के साथ पुलिस अफसर भी जाएंगे

वह इकठ्ठा होंगे तो लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ सकती है। सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने नारायण साईं को हवाई मार्ग से ले जाने के लिए बोला। इस पर राज्य सरकार ने कहा कि नारायण के साथ पुलिस अफसर और कर्मचारी भी जाएंगे और उनका खर्चा भी याचिकाकर्ता को उठाना होगा। इसके बाद हाइकोर्ट ने नारायण साईं को 10 लाख डिपॉजिट करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि इस मुलाकात के लिए पहले यह रकम जमा की जाए। खर्च होगा वह काट के बाकी की रकम लौटा दी जाएगी।  वहीं आगे बता दें कि नारायण साईं को सूरत जेल से विशेष विमान से जोधपुर ले जाया जाएगा। इस दौरान 1 एसपी, 2 हेड कांस्टेबल और 2 कांस्टेबल वहां मौजूद रहेंगे।

साभार : दैनिक जागरण

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।