लोड हो रहा है...

एम्बुलेंस को रास्ता न देने पर 2.5 लाख का जुर्माना, ड्राइविंग लाइसेंस हुआ निलंबित

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

तिरुवनंतपुरम. केरल में एंबुलेंस का रास्ता रोकने के मामले में एक व्यक्ति का लाइसेंस रद्द कर दिया और उस पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। ये घटना एंबुलेंस में लगे कैमरे में कैद हुई थी, इस आधार पर केरल पुलिस ने शख्स पर कार्रवाई की है।

शख्स का लाइसेंस किया गया रद्द

जानकारी के अनुसार, केरल पुलिस की तरफ से एक सख्त कदम उठाते हुए, त्रिशूर के रहने वाले शख्स का लाइसेंस रद्द कर दिया गया और उसे एंबुलेंस को रोकने के लिए 2.5 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया। यह घटना 7 नवंबर को चालाकुडी इलाके में हुई थी, जिसमें ड्राइवर ने कथित तौर पर त्रिशूर मेडिकल कॉलेज के रास्ते में एक एंबुलेंस को रास्ता नहीं दिया था, हालांकि कुछ रिपोर्टों से पता चला कि एंबुलेंस पोन्नानी से आ रही थी।

कैमरे में कैद हुई पूरी घटना

मामले में एंबुलेंस में लगे डैशकैम फुटेज में दिखाया गया है कि एंबुलेंस एक संकरी, दो-लेन वाली सड़क पर दो मिनट से अधिक समय तक सिल्वर रंग की कार का पीछा करती रही। इस दौरान एंबुलेंस चालक के बार-बार हॉर्न बजाने और सायरन बजाने के बावजूद, कार चालक उसे आगे निकलने नहीं देता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद केरल पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और कार चालक के खिलाफ कार्रवाई की।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

वहीं पुलिस की इस कार्रवाई की सोशल मीडिया पर खूब सराहना की जा रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खूब शेयर किया गया। इसके साथ इस वीडियो पर तीखी बहस हो रही है, सोशल मीडिया यूजर्स पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना कर रहे हैं और कार चालक के ऐसे व्यवहार की जमकर आलोचना कर रहे हैं।

- Advertisement -

साभार : अमर उजाला

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।