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अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. दिल्ली शराब नीति केस में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी गई। केजरीवाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनकी न्यायिक हिरासत बुधवार 19 जून को खत्म हो रही है। केजरीवाल को कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से न्यायिक हिरासत बढ़ाने का विरोध किया। कहा कि ED के पास ऐसा कोई तर्क नहीं है, जिसके आधार पर ज्यूडिशियल कस्टडी बढ़ाई जा सके।

केजरीवाल को 21 मार्च को अरेस्ट किया गया था। 1 अप्रैल को वे तिहाड़ जेल भेजे गए। सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। जमानत पर 21 दिन बाहर रहने के बाद 2 जून की शाम 5 बजे केजरीवाल ने तिहाड़ में सरेंडर किया था। सरेंडर करने के करीब 30 मिनट बाद ही केजरीवाल को 5 जून तक की ED की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया था। इसके बाद उनकी कस्टडी 19 जून तक बढ़ाई गई।

ED का दावा- केजरीवाल का वजन 7 किलो घटा नहीं, 1 किलो बढ़ा

ED ने कोर्ट में दावा किया था कि केजरीवाल ने तथ्यों को दबाया और अपनी सेहत को लेकर झूठे बयान दिए हैं। उनका वजन 1 किलो बढ़ गया है, लेकिन वे झूठा दावा कर रहे हैं कि उनका वजन 7 किलो कम हो गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा था कि केजरीवाल ने 31 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भ्रामक दावा भी किया कि वह 2 जून को सरेंडर करने जा रहे हैं। हालांकि, कोर्ट में केजरीवाल के वकील ने कहा कि वे बीमार हैं और उन्हें इलाज की जरूरत है।

केजरीवाल ने कहा था- पता नहीं, कब बाहर आऊंगा
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केजरीवाल ने 2 जून को सरेंडर के पहले AAP कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि मैं देश बचाने के लिए जेल जा रहा हूं। मुझे नहीं पता कब वापस आऊंगा। वहां मेरे साथ क्या-क्या होगा, मुझे नहीं पता।

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सुप्रीम कोर्ट ने मुझे चुनाव प्रचार के लिए 21 दिनों की जमानत दी थी। मैं इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देना चाहता हूं। आज, मैं फिर से तिहाड़ जेल जा रहा हूं। मैंने इन 21 दिनों में एक मिनट भी बर्बाद नहीं किया।

उन्होंने आगे कहा था कि मेरे लिए AAP महत्वपूर्ण नहीं है, हमारे लिए देश महत्वपूर्ण है। मैं दिल्ली के लोगों से कहना चाहता हूं कि मैंने घोटाला किया है। मैं फिर से जेल जा रहा हूं, क्योंकि मैंने तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई है।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।