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गायक हिमेश रेशमिया के पिता फिल्म निर्माता विवेक का हुआ निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. बॉलीवुड सिंगर हिमेश रेशमिया (Himesh Reshammiya) के पिता विपिन रेशमिया (Vipin Reshammiya) का निधन हो गया है. हिमेश के पिता 87 साल के थे. एक रिपोर्ट के अनुसार उनको काफी लंबे समय से सांस लेने में दिक्कत आ रही थी. जहां उनको मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां लंबे समय के इलाज के बाद उनका निधन हो गया है. बताया यह भी जा रहा है कि कल रात 8.30 बजे विपिन रेशमिया ने अंतिम सांस ली. वहीं इस बात की जानकारी उनके एक करीबी सूत्र ने दी है.

हिमेश रेशमिया के पिता का हुआ निधन

एक रिपोर्ट के अनुसार हिमेश रेशमिया के एक करीबी ने मीडिया को बताया कि उनके पिता को उम्र की वजह से काफी परेशानियां आ रही थीं. एक समय था जब विपिन रेशमिया को वह पापा कहती थीं. उन दिनों वह टीवी सीरियल्स बनाते थे. टीवी के बाद उन्होंने बॉलीवुड में म्यूजिक डायरेक्टर के तौर पर काम किया. बाद में हिमेश रेशमिया ने भी अपने पिताजी का रास्ता अपनाया था.

आज होगा अंतिम संस्कार

रिपोर्ट के अनुसार विपिन रेशमिया का अंतिम संस्कार आज यानी 19 सितंबर को मुंबई (Mumbai) में होगा. हिमेश का परिवार जल्द ही उनका पार्थिव शरीर घर लेकर आने वाला है. उनके पिता के निधन की खबर सुनकर हिमेश रेशमिया के फैंस काफी दुखी हो गए हैं. जहां फैंस सोशल मीडिया पर उनके पिता को श्रद्धांजलि भी दे रहे हैं.

फिल्में प्रोड्यूस भी कर चुके हैं विपिन रेशमिया

विपिन रेशमिया अपने बेटे हिमेश रेशमिया की फिल्में द एक्सपोज (The Xpose) और तेरा सुरूर (Teraa Surroor) प्रोड्यूस कर चुके हैं. विपिन ने हिमेश को सुपरस्टार बनने के लिए सलमान खान (Salman Khan) के साथ हाथ मिलाया था. इसके बावजूद भी हिमेश रेशमिया एक्टिंग करियर में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।