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अखिलेश यादव ने कांग्रेस को गठबंधन के लिए दी 3 दिन की डेडलाइन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटना तय माना जा रहा है. अखिलेश यादव की तरफ से 17 सीटों की ऑफर जा चुकी है, लेकिन अभी भी मुरादाबाद और बिजनौर में से एक सीट को लेकर पेच फंसा है. सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव के खेमे की तरफ से कांग्रेस को 3 दिन में फैसला लेने के लिए कहा गया है.

समाजवादी पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश से उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. प्रत्याशियों की सूची में माफिया-राजनीतिक नेता मुख्तार अंसारी के भाई और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद अफजाल अंसारी का नाम भी शामिल है. सपा ने यह सूची ऐसे समय जारी की है, जब उसे आगामी राज्यसभा चुनाव के लिये पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्गों के उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने पर पार्टी नेताओं और गठबंधन के सहयोगी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

इस बीच, सपा ने सोमवार को ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया)’ में अपनी सहयोगी कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में 80 में से 17 लोकसभा सीट देने की पेशकश की है. सपा का कहना है कि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव रायबरेली में राहुल गांधी के नेतृत्व वाली भारत जोड़ो न्याय यात्रा में तभी शामिल होंगे, जब कांग्रेस द्वारा 17 सीट के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाएगा.

सपा उम्मीदवारों की सूची में शामिल अन्य प्रत्याशियों में हरेंद्र मलिक (मुजफ्फरनगर), नीरज मौर्य (आंवला), राजेश कश्यप (शाहजहांपुर-सुरक्षित), ऊषा वर्मा (हरदोई- सुरक्षित), आर के चौधरी (मोहनलालगंज- सुरक्षित), एसपी सिंह पटेल (प्रतापगढ़), रमेश गौतम (बहराइच -सुरक्षित), श्रेया वर्मा (गोंडा), वीरेंद्र सिंह (चंदौली) और रामपाल राजवंशी (मिश्रिख – सुरक्षित) हैं.  इन 11 उम्मीदवारों में से चार पिछड़े समुदाय से हैं. इसके अलावा पांच अनुसूचित जाति से हैं तथा वीरेंद्र सिंह क्षत्रिय हैं जबकि अफजाल अंसारी मुस्लिम हैं. सपा ने इससे पहले 30 जनवरी को उत्तर प्रदेश की 16 लोकसभा सीट पर अपने उम्मीदवार घोषित किये थे.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।