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युद्ध के खतरे को देखते हुए अमेरिका ने यूक्रेन में अपना दूतावास किया बंद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कीव. रूस यूक्रेन युद्ध के बीच तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने कीव स्थित अपने दूतावास को बंद करने का आदेश दिया है। साथ ही दूतावास के अधिकारियों को सुरक्षित जगहों पर पनाह लेने की सलाह दी है। दरअसल अमेरिका को डर है कि उनके कीव स्थित दूतावास पर हवाई हमला हो सकता है। अमेरिका के विदेश विभाग ने बयान जारी कर यह जानकारी दी है।

अमेरिका की यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल की मंजूरी देने के बाद हालात हुए तनावपूर्ण

गौरतलब है कि अमेरिका का यह कदम ऐसे वक्त सामने आया है, जब रूस और यूक्रेन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। खासकर अमेरिका द्वारा यूक्रेन को रूस के भीतर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले की मंजूरी देने के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। रूस ने भी इसे लेकर धमकी दी है। दरअसल अमेरिका की मंजूरी के बाद रूस के अहम सैन्य और राजनीतिक प्रतिष्ठान यूक्रेन के निशाने पर आ गए हैं। इसके बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी संशोधित परमाणु नीति पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसके तहत रूस यूक्रेन युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले को तीसरे देश की संलिप्तता मानी जाएगी और इसके जवाब में रूस परमाणु हमला भी कर सकता है।

यूरोपीय देश युद्ध की दहशत में

ताजा घटनाक्रम के बाद हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि यूरोप के तीन देशों नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड में दहशत फैल गई है और इन तीनों देशों की सरकारों ने अपने नागरिकों को सभी जरूरी चीजों का स्टॉक रखने की सलाह दी है और साथ ही अपने सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है। स्वीडन ने तो परमाणु युद्ध की स्थिति में लोगों को विकिरण से बचने के लिए इस्तेमाल होने वाली आयोडीन की गोली खरीदकर रखने के निर्देश दिए हैं। नाटो और यूरोपीय संघ के देश हंगरी और स्लोवाकिया ने जो बाइडन के फैसले से नाराजगी जताई है और उन पर रूस यूक्रेन युद्ध को भड़काने का आरोप लगाया है।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।