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पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपी में थाने में घुसकर जलाया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में भीड़ ने ईशनिंदा के एक आरोपी को जलाकर मार डाला। पुलिस ने बताया कि गुरुवार रात स्वात के मद्यन इलाके में ये घटना हुई। कुरान की बेअदबी करने के आरोपी को पुलिस थाने लेकर आई थी। थाने के सामने बड़ी संख्या में भीड़ जमा हो गई और आरोपी को तुरंत सजा की मांग करते हुए उसे बाहर खींच लाई। इसके बाद उसको पीटते हुए आग के हवाले कर दिया। स्वात जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) डॉक्टर जाहिदुल्ला खान ने बताया है कि लोगों ने पुलिस स्टेशन और एक मोबाइल वाहन में भी आग लगा दी। घटना को अंजाम देने वाली भीड़ को तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से जुड़ा बताया गया है। टीएलपी का हाल के समय में पाकिस्तान में इस तरह की कई घटनाओं में नाम सामने आया है। टीएलपी के लोगों ने ईशनिंदा के आरोपियों को निशाना बनाने के अलावा अल्पसंख्यक समुदाय पर भी हमले किए हैं।

टीएलपी से जुड़े लोग इस्लाम के बरेलवी फिरके को मानने वाले हैं। इस फिरके (संप्रदाय) की शुरुआत भारत के बरेली शहर से हुई थी। इस फिरके के संस्थापक अहमद रजा खानबरेली के ही रहने वाले थे। भारत पाकिस्तान में इस फिरके को मानने वालों की बड़ी तादाद है। पाकिस्तान में हाल के वर्षों में टीएलपी से जुड़े बरेलवी मौलवियों ने कई बार हिंसा भड़काकर और सड़क पर उतरकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया है। पाकिस्तान बनने के बाद कई दशकों तक बरेलवी बहुत प्रभावी नहीं रहे थे लेकिन 2015 में टीएलपी के उभरने के बाद तेजी से चीजें बदलीं और बरेलवी मसला पाकिस्तान में धार्मिक राजनीति के केंद्र में आ गया। इनके समर्थक ‘स‍र तन से जुदा’ के नारे भी लगाते हैं। इनसे भारत में भी काफी लोग प्रभावित हैं।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।