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अगर पाकिस्तान भारत से दोस्ती चाहते हैं तो आतंकवाद बंद करना होगा : फारूक अब्दुल्ला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में आतंकियों के कायराना हरकत को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हुक्मरान से हम कहना चाहते हैं कि कश्मीर पाकिस्तान नहीं बनेगा. फारूक ने कहा, ”बहुत ही दर्दनाक वाक्या है. गरीब मजदूरों को दरिंदों ने शहीद कर दिया. एक डॉक्टर साहब भी जान गवां बैठे. अब बताइए, इन दरिदों को क्या मिलेगा? क्या वो समझते हैं पाकिस्तान बनेगा?”

भारत-पाकिस्तान की दोस्ती पर क्या बोले फारूक अब्दुल्ला?

उन्होंने कहा, ”वो (आतंकी) वहां (पाकिस्तान) से आ रहे हैं, हम चाहते हैं कि मामला खत्म हो. हमलोग आगे बढ़ें, मुश्किलों से आगे निकले. मैं पाकिस्तान के हुक्मरानों से कहना चाहता हूं कि अगर वो भारत से दोस्ती चाहते हैं तो ये सब बंद करना होगा. कश्मीर पाकिस्तान नहीं बनेगा, नहीं बनेगा.” फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ”हमें मेहरबानी करके इज्जत से रहने दीजिए, तरक्की करने दीजिए. कब तक मुश्किलों में डालते रहेंगे. 47 से आपने शुरू किया, बेगुनाहों को मरवाया. जब 75 साल में पाकिस्तान नहीं बना तो क्या अब बन जाएगा.”

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि अल्लाह के वास्ते अपने मु्ल्क की तरफ देखिए, तरक्की कीजिए. हमें खुदा के पास छोड़ दीजिए, हम मुसीबतों से निकलना चाहते हैं, हम गरीबी और बेरोजगारी से निकलना चाहते हैं. वक्त आ गया है पाकिस्तान को ये सब बंद करना होगा.

कब हुआ आतंकी हमला?

रविवार (20 अक्टूबर) को श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सुरंग निर्माण स्थल पर आतंकवादियों के हमले में एक डॉक्टर और 6 मजदूरों की मौत हो गई. अधिकारी ने बताया कि अज्ञात आतंकवादियों ने यह हमला उस समय किया जब गांदरबल के गुंड में सुरंग परियोजना पर काम कर रहे मजदूर और अन्य कर्मचारी देर शाम अपने शिविर में लौट रहे थे.

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।