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मंदिर वहीं बना है, जहां बनाने का संकल्प लिया था : योगी आदित्यनाथ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद एक संबोधन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंदिर वहीं बना है, जहां बनाने के संकल्प लिया था. सीएम ने कहा कि रामलला 500 साल बाद अपने मंदिर विराजे हैं. ऐसा लग रहा है मानों हम त्रेता युग में आ गए हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए बहुसंख्यक समाज ने संघर्ष किया और लड़ाई लड़ी.

उन्होंने कहा कि आज हर घर में राम का नाम लिया जा रहा है. राम का जीवन हमें संयम सिखाता है और भारतीय समाज ने भी संयम का परिचय दिया. सीएम ने कहा कि अयोध्या धाम का भी विकास हो रहा है. एक जमाने में यह सपना था कि अयोध्या में हवाईअड्डा हो जो आज साकार हो रहा है.

भारत का हर नगर, हर ग्राम अयोध्या धाम – CM
मुख्यमंत्री ने कहा कि “प्रभु राम लला के भव्य, दिव्य और नव्य धाम में विराजने की आप सभी को कोटि-कोटि बधाई. मन भावुक है. निश्चित रूप से आप सब भी ऐसा महसूस कर रहे होंगे. आज इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत का हर नगर, हर ग्राम अयोध्या धाम है. हर मन में राम नाम है. हर आंख हर्ष और संतोष के आंसू से भीगी है. हर जुबान राम नाम जप रही है. रोम-रोम में राम रमे हैं.ऐसा लगता है कि हम त्रेतायुग में आ गए हैं.”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “श्री राम जन्मभूमि संभवत: विश्व में पहला ऐसा अनूठा प्रकरण होगा जिसमें किसी राष्ट्र के बहुसंख्यक समाज ने अपने ही राष्ट्र में, अपने आराध्य की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण के लिए इतने वर्षों और इतने स्तरों पर लड़ाई लड़ी हो. आज आत्मा प्रभुल्लित है इस बात से कि मंदिर वहीं बना है जहां बनाने का संकल्प लिया था.”

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।