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उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद पर जानलेवा हमला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. नाक पर चोट लगी, खून बहा, चश्मा तक टूट गया। मुझे मारने की साजिश रची गई है। जानलेवा हमला कराया गया है। करीब 20 से 25 लोग थे। किस्मत से बचाव हो गया, वरना पता नहीं क्या होता? यह कहना है उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का, जिन पर बीती रात जानलेवा हमला हुआ।

वारदात उस समय अंजाम दी गई, जब वे एक शादी समारोह से लौट रहे थे। खलीलाबाद कोतवाली के मोहम्मदपुर कठार गांव में उन्हें घेर कर मारपीट की गई। वहीं उन्होंने हमला कराने का आरोपी समाजवादी पार्टी पर लगाया है। हालांकि पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 4 लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन वे समर्थकों के साथ अस्पताल पुलिस चौकी के बाहर धरने पर बैठे हैं।

अमर्यादित शब्दों के इस्तेमाल का आरोप

SP सत्यजीत गुप्ता ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हमला संतकबीरनगर में हुआ। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद एक शादी समारोह में गए थे। उनके साथ उनके समर्थक भी थे, लेकिन अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। इसमें मंत्री संजय निषाद को चोटें आईं हैं। सांसद इंजीनियर प्रवीण निषाद और पार्टी के तीनों विधायकों समेत मंत्री निषाद के समर्थक जिला अस्पताल पहुंचे और धरने पर बैठ गए।

वहीं कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अपने ऊपर हुए हमले को लेकर समाजवादी पार्टी के लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा हमलावरों ने अमर्यादित शब्दों का भी इस्तेमाल किया। उन्हें समझाने का प्रयास किया तो वे हमलावर हो गए। गाली गलौज और मारपीट करने लगे। काफी लोग थे, जिनसे बचाकर समर्थक अस्पताल ले गए। अगर वे मौके से नहीं निकलते तो आरोपी कुछ भी कर सकते थे। पुलिस बुलाने का मौका तक नहीं मिला।

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अपनी सुरक्षा पर मंत्री निषाद ने उठाए सवाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संजय निषाद ने अपनी सुरक्षा को लेकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हमारे राजनीतिक मैदान में आने से समाजवादी पार्टी का पतन हो रहा है। हम निषादों और अन्य जातियों का नेतृत्व कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं जब से आया हूं, तब से लोग जातीय संघर्ष करवा रहे हैं।

साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।