लोड हो रहा है...

नेपाल में बस गिरने से 14 भारतीयों की मौत, 17 घायल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

काठमांडू. नेपाल में यात्रियों को ले जा रही बस के नदी में गिरने से बड़ा हादसा हो गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक बस के नदी में गिरने से 14 भारतीयों की मौत हो गई. वहीं 17 लोग घायल बताए जा रहे हैं. इस बस में कुल 40 यात्री सवार थे. जो बस हादसे का शिकार हुई वो भारत में रजिस्टर है. राजधानी काठमांडू में अपने गंतव्य से लगभग 110 किलोमीटर दूर तनहुन जिले में मार्सयांगडी नदी में गिर गई, जिससे ये दर्दनाक हादसा हुआ.

लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू जारी

एक अधिकारी के अनुसार, बस पोखरा से काठमांडू जा रही थी. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “यूपी (उत्तर प्रदेश) एफटी 7623 नंबर प्लेट वाली बस नदी में गिर गई.” दुर्घटना के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है. रेस्क्यू टीम ने 14 शवों को बरामद किया और 16 लोगों को सुरक्षित निकालने में कामयाबी पाई है. दुर्घटनाग्रस्त बस पोखरा के मझेरी रिजार्ट में ठहरे हुए भारतीय को लेकर काठमांडू जा रही थी. सशस्त्र पुलिस के सह प्रवक्ता और डीएसपी शैलेन्द्र थापा ने बताया कि दोपहर दो बजे तक 14 लोगों के शव घटनास्थल से बरामद किया गया है. साथ ही उन्होंने बताया कि घटनास्थल से 16 घायल लोगों को बचाया गया. शुक्रवार सुबह पोखरा से काठमांडू जा रही यूपी 53 एफटी 7623 बस तनाहुन के ऐनापहारा नामक स्थान से मार्स्यांगडी नदी में गिर गई. बस नदी किनारे फंसी हुई है. पुलिस ने बताया कि बस हादसे में कई लोग हताहत हुए हैं.

हादसे पर तनहुं डीएसपी ने दी ये जानकारी

तनहुन डीएसपी दीपक कुमार राय ने कहा है कि बचाव कार्य जारी रहने से मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है. सशस्त्र पुलिस बल नेपाल आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण स्कूल के एसएसपी माधव पौडेल की कमान के तहत 10 गोताखोरों और नंबर 23 मनकामना गण भानु तनाहुन के 35 लोगों सहित 45 लोगों की एक टीम को बचाव के लिए लगाया गया है. चूंकि घटना स्थल खड़ी और दुर्गम है, इसलिए बचावकर्मी रस्सी के सहारे बस वाली जगह पर पहुंचे और बचाव में सक्रिय हैं.

साभार : एनडीटीवी

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।